रिपोर्ट: सऊद अंसारी
गाजीपुर (Ghazipur) में रेलवे स्टेशन पर सतर्क पुलिसिंग का एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया, जहां घर से नाराज होकर भागी एक किशोरी को जीआरपी (GRP) टीम ने सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। यह घटना 17 मार्च 2026 की है, जब समय रहते की गई कार्रवाई से एक संभावित अनहोनी को टाल दिया गया।
रेलवे स्टेशन पर सतर्कता से मिली सफलता:
रेलवे स्टेशन गाजीपुर सिटी (Ghazipur City Railway Station) पर जीआरपी (GRP) की टीम नियमित चेकिंग अभियान चला रही थी। यह अभियान पुलिस अधीक्षक रेलवे गोरखपुर (Superintendent of Police Railway Gorakhpur) और पुलिस उपाधीक्षक रेलवे बलिया (Deputy Superintendent Railway Ballia) के निर्देशन में संचालित किया जा रहा था। इसी दौरान हेल्पलाइन नंबर 139 से प्राप्त सूचना के आधार पर प्लेटफार्म नंबर 1 पर खड़ी कामायनी एक्सप्रेस (Kamayani Express) में जांच की जा रही थी, जहां एक किशोरी संदिग्ध स्थिति में अकेली बैठी मिली।
पूछताछ में सामने आई पूरी बात:
मौके पर मौजूद महिला कांस्टेबल द्वारा जब किशोरी से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम सोनम बिंद (Sonam Bind) पुत्री सत्येंद्र कुमार बताया। वह ग्राम डुमरी, थाना बासडीह (Bansdih), जनपद बलिया (Ballia) की निवासी है। किशोरी ने बताया कि वह अपनी मां की डांट से नाराज होकर घर से निकल आई थी और ट्रेन के माध्यम से कहीं जाने की कोशिश कर रही थी। पुलिस की तत्परता से उसकी स्थिति को समझते हुए उसे सुरक्षित हिरासत में लिया गया।
तलाशी में मिला सामान:
पुलिस टीम ने किशोरी के पास मौजूद लेडीज पर्स की तलाशी ली, जिसमें चांदी और पीली धातु के कुछ आभूषण सहित अन्य सामान बरामद हुआ। इसके बाद किशोरी को जीआरपी थाने लाया गया, जहां आगे की आवश्यक कार्रवाई की गई और उसके परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास शुरू किया गया।
परिजनों को सौंपा गया सुपुर्द:
इसी दौरान किशोरी की मां उर्मिला देवी (Urmila Devi) अपनी बेटी की तलाश करते हुए थाने पहुंचीं। पुलिस द्वारा पहचान की प्रक्रिया पूरी कराए जाने के बाद किशोरी को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया। बेटी को सकुशल वापस पाकर परिजन भावुक हो उठे और जीआरपी टीम के कार्य की सराहना की। यह घटना पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता को दर्शाती है।
टीम के प्रयासों की सराहना:
इस पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष पवन कुमार (Pawan Kumar) के नेतृत्व में उपनिरीक्षक पवन कुमार, कांस्टेबल योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav), शिवकुमार तिवारी (Shivkumar Tiwari) और महिला कांस्टेबल सुमित्रा पटेल (Sumitra Patel) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने मिलकर समय पर कार्रवाई करते हुए किशोरी को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया।
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