रिपोर्टर: अनुज कुमार
प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में पीएसी बल की भूमिका ऐतिहासिक रही है। पीएसी बल ने स्थापना के 78 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और इस अवसर पर बल के योगदान, साहस और अनुशासन को याद करते हुए शुभकामनाएं दी गईं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, पर्व-त्योहारों की सुरक्षा, अति विशिष्ट महानुभावों के आगमन और लोकतंत्र के पर्व चुनावी कार्यक्रमों में पीएसी बल ने निरंतर अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया है।
कानून व्यवस्था से आपदा प्रबंधन तक अहम भूमिका:
पीएसी बल (Provincial Armed Constabulary) प्रदेश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहकर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी बल की सक्रिय भागीदारी रही है। पर्व-त्योहारों के दौरान भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में पीएसी बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए चुनावों के दौरान भी पीएसी बल की तैनाती अहम भूमिका निभाती है।
संसद हमले के समय अदम्य साहस का परिचय:
वर्ष 2001 में संसद पर हुए कायराना आतंकी हमले के दौरान सुरक्षा में तैनात 30वीं वाहिनी पीएसी के जवानों ने अद्वितीय साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। यह घटना पीएसी बल के शौर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
पुनर्जीवन और सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रयास:
सरकार द्वारा पीएसी बल की 46 कंपनियों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया गया है। इसके साथ ही बल को अत्याधुनिक हथियारों और दंगा नियंत्रण के आधुनिक साधनों से सुसज्जित किया गया है, जिससे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
भर्तियों से बढ़ी ताकत और क्षमता:
पीएसी बल में 41 हजार 893 आरक्षियों के साथ-साथ प्लाटून कमांडरों की भर्ती की गई है। सीधी भर्ती के अंतर्गत 15 हजार से अधिक आरक्षियों और प्लाटून कमांडरों की भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में प्रचलित है। इन भर्तियों से बल की कार्यक्षमता और तैनाती क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महिला बटालियन और एसडीआरएफ का योगदान:
सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से तीन महिला कर्मियों की बटालियन की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में राज्य आपदा मोचन बल एसडीआरएफ (SDRF) भी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
खेल और दक्षता को बढ़ावा:
पहली बार 480 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती की गई है। साथ ही 768 पदों पर भर्ती और अधियाचन प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2024 में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर खेल बजट को 70 लाख से बढ़ाकर 10 करोड़ किया गया, जिससे पुलिस कर्मियों में खेल और फिटनेस को बढ़ावा मिल सके।
पुलिस बल में ऐतिहासिक सुधार:
विगत 8 वर्षों में उत्तरप्रदेश में 2 लाख 19 हजार पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गई है। वर्तमान में पुलिस बल में 44 हजार से अधिक महिला कार्मिक सेवाएं दे रही हैं। पुराने और जर्जर भवनों के स्थान पर अब हाई राइज़ भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे कार्य वातावरण में सुधार हुआ है।
मॉडर्न पुलिसिंग की नई पहचान:
मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर थाना और साइबर सेल आज यूपी पुलिस (UP Police) की पहचान बन चुके हैं। प्रदेश में अत्याधुनिक एफएसएल लैब्स (FSL Labs) तैयार की गई हैं और 17 नगर निगम क्षेत्रों में सेफ सिटी (Safe City) के लक्ष्य को प्राप्त किया गया है।
कानून के राज से बढ़ा आत्मविश्वास:
उत्तरप्रदेश में जो आत्मविश्वास का माहौल बना है, उसके पीछे कानून का राज प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसी क्रम में आज प्रदेश में उत्तरप्रदेश पुलिस और पीएसी बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर सहित अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के दौरान वंदेमातरम का सामूहिक गायन भी किया गया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के समय युवाओं में जोश और प्रेरणा का संचार किया था।
अनुशासन और सम्मान का आश्वासन:
पीएसी बल के जवानों से साहस, अनुशासन और कठिन प्रशिक्षण को अपनी पहचान बनाए रखने का आह्वान किया गया। सरकार की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि बल के सम्मान और संसाधनों के लिए हर संभव सहयोग और समर्थन निरंतर प्रदान किया जाता रहेगा।
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