सोनभद्र खदान हादसा, 7 की मौत, रेस्क्यू जारी, अब भी चट्टान में दबी कई ज़िंदगियाँ!

सोनभद्र (Sonbhadra)। ओबरा थाना क्षेत्र के कृष्णा माइनिंग खदान (Krishna Mining Khadan) में रविवार देर शाम हुए बड़े हादसे के बाद रेस्क्यू मिशन लगातार जारी है। चट्टान धंसने से हुए इस गंभीर हादसे ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। खदान में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पिछले 65 घंटे से अधिक समय से लगातार बचाव कार्य चल रहा है। NDRF और SDRF की टीमें मौके पर लगी हैं और भारी पत्थरों व मलबे को हटाने का प्रयास कर रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के अंदर कोई अन्य मजदूर नहीं बचा है, तब तक रेस्क्यू बंद नहीं होगा।

चट्टान का भार बना बड़ी चुनौती:
रेस्क्यू ऑपरेशन को सबसे ज्यादा चुनौती उस विशाल चट्टान से मिल रही है, जिसके धंसने से यह हादसा हुआ। इस चट्टान का वजन 70 से 75 टन के बीच बताया जा रहा है और इसे हटाने में मशीनरी व बल, दोनों के समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। चट्टान के कारण कई जगहों पर बचाव रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे टीमों को अतिरिक्त समय लग रहा है।

मंगलवार को मिला एक और शव:
सोमवार देर शाम तक मलबे के नीचे से 6 शव बरामद किए गए थे, जिनमें दो सगे भाइयों के शव भी शामिल थे। मंगलवार, 18 नवंबर को एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। रेस्क्यू टीमें लगातार पत्थरों को काटने, तोड़ने और सुरक्षित हटाने का काम कर रही हैं ताकि यदि कोई और मजदूर जीवित है तो उसे जल्द से जल्द निकाला जा सके।

एनजीटी ने लगाया सोनभद्र डीएम पर जुर्माना:
सोनभद्र जिले में अवैध खनन के मामलों पर National Green Tribunal (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। अवैध खनन पर जांच रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत न करने के कारण डीएम बीएन सिंह पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। NGT ने इसे न्यायालय के आदेशों का पालन न करने की श्रेणी में रखा है।
NGT की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल हैं, ने अप्रैल 2024 में एक संयुक्त समिति गठित की थी। इस समिति में जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था और उन्हें समयबद्ध रिपोर्ट देनी थी, जिसमें देरी गंभीर मानी गई है।

अवैध खनन पर निगरानी का निर्देश:
एनजीटी की इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध खनन पर निगरानी बढ़ने की संभावना है। न्यायाधिकरण का स्पष्ट कहना है कि खनन गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और प्रशासनिक उदासीनता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रेस्क्यू पर जिला प्रशासन की पैनी नजर:
प्रशासन ने खदान दुर्घटना को लेकर कहा है कि यह जांच का विषय है कि उस समय कितने मजदूर खदान में थे और कितने सुरक्षित बाहर निकले थे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने तक टीमें मौके पर बनी रहेंगी। रेस्क्यू ऑपरेशन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो।

खदान हादसे ने उठाए सवाल:
ओबरा क्षेत्र में लगातार हो रहे खनन कार्यों की सुरक्षा तैयारियों पर यह हादसा बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मजदूरों की सुरक्षा, खदानों में निगरानी और मशीनरी की नियमित जांच जैसे मुद्दे अब और गंभीरता से उठने लगे हैं।
प्रशासन को भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत दिखाई दे रही है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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