अयोध्या (Ayodhya) से लेकर सहारनपुर (Saharanpur) तक दिल्ली हमले की जांच में एजेंसियों ने अपनी पड़ताल और तेज कर दी है। डॉ. परवेज (Dr. Parvez) और शाहीन (Shaheen) से जुड़े नेटवर्क की हर गतिविधि खंगाली जा रही है। NIA और ATS कई स्तरों पर जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यूपी नेटवर्क की इस साजिश में क्या भूमिका थी। प्रारंभिक जानकारी से स्पष्ट है कि एजेंसियां किसी भी सुराग को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं और हर लिंक को बारीकी से जांचा जा रहा है।
अयोध्या में पढ़ाई और इंटर्नशिप की जांच:
सूत्रों के अनुसार, डॉ. परवेज की पढ़ाई और इंटर्नशिप से जुड़े वर्षों की जानकारी की भी गहन जांच शुरू की गई है। NIA की एक टीम जल्द ही अयोध्या जाएगी, जहां परवेज ने कुछ समय तक मेडिकल इंटर्नशिप की थी। टीम वहां के अस्पताल रिकॉर्ड और इंटर्नशिप के दौरान जुड़े डॉक्टरों और छात्रों से पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि क्या उसी समय किसी संदिग्ध संगठन से परवेज का संपर्क स्थापित हुआ था।
ATS द्वारा करीबियों से पूछताछ तेज:
ATS ने शाहीन और परवेज से जुड़े 50 से अधिक व्यक्तियों से पूछताछ पूरी कर ली है। इन पूछताछों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दोनों के संपर्क में सक्रिय रूप से कौन लोग थे और कश्मीर से उनके संबंध कैसे स्थापित हुए। अभी तक किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन कई संदिग्धों को निगरानी में रखा गया है। जांच टीमें उन लोगों पर विशेष फोकस कर रही हैं जिन्होंने पिछले दो वर्षों में परवेज और शाहीन के साथ यात्रा, पढ़ाई या पेशेवर गतिविधियों में भाग लिया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस से मांगी गई डिजिटल रिपोर्ट:
जांच के अहम हिस्से के तहत NIA ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से डॉ. परवेज के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस—लैपटॉप, मोबाइल और हार्ड ड्राइव—की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट मांगी है। लखनऊ से बरामद डिवाइसों की फोरेंसिक जांच भी तेज हो गई है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इन डिवाइसों में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड और फाइलें इस केस की कई कड़ियों को जोड़ सकती हैं और यह स्पष्ट कर सकती हैं कि दिल्ली हमले की योजना में यूपी नेटवर्क की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सहारनपुर RTO में वाहन दस्तावेजों की जांच:
जांच सिर्फ डिजिटल डेटा तक सीमित नहीं है। ATS की एक टीम सहारनपुर RTO भी पहुंची, जहां संदिग्ध वाहनों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। एजेंसियों को आशंका है कि अमोनियम नाइट्रेट या अन्य फर्टिलाइजर की अवैध सप्लाई में कुछ वाहन नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। इसी शक के आधार पर कई पुराने रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर एंट्री खंगाली जा रही हैं।
जांच एजेंसियों का पूरा फोकस हर लिंक पर:
दिल्ली हमले के बाद जांच एजेंसियां इस मामले में किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं। चाहे लिंक ऑनलाइन हो, वित्तीय हो, ट्रैवल हो या सोशल नेटवर्क—हर पहलू पर अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं। भले ही अभी तक किसी पर सीधी कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां मानकर चल रही हैं कि यूपी नेटवर्क इस पूरे मामले की कई बड़ी परतें खोल सकता है।
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