बलिया (Ballia) के ऐतिहासिक कोषागार परिसर में स्थित न्यायेश्वर महादेव मंदिर का स्थापना दिवस इस वर्ष भक्ति, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के अनूठे संगम के रूप में बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, अधिकारियों, कर्मचारियों, पेंशनरों और स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता की। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने मंदिर परिसर में आयोजित विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। मंदिर स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश:
इस अवसर पर अर्चना दुबे ने कहा कि न्यायेश्वर महादेव मंदिर का स्थापना दिवस अत्यंत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और सनातन परंपराओं की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
अर्चना दुबे ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के संरक्षण और हरित वातावरण के निर्माण के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना था कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य भी है।
कोषागार परिसर के विकास कार्यों की सराहना:
कार्यक्रम में मौजूद जिला महिला अस्पताल (District Women Hospital) के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ मणि दुबे ने ऐतिहासिक कोषागार परिसर में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे के कार्यभार संभालने के बाद परिसर में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
उन्होंने बताया कि पहले जहां लोग इस परिसर में आने से बचते थे, वहीं अब यहां का वातावरण लोगों को आकर्षित करता है। परिसर में पहुंचने पर शांति, स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो यहां किए गए विकास कार्यों का परिणाम है।
मंदिर समाज को जोड़ने का माध्यम:
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, पेंशनरों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना और आस्था का केंद्र नहीं होता, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को एकजुट करने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। मंदिरों के माध्यम से समाज में सहयोग, सेवा और सद्भावना की भावना को बढ़ावा मिलता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणादायक पहल:
आनंद दुबे और अर्चना दुबे दंपती लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय रूप से समर्पित बताए जाते हैं। उनके प्रयासों और प्रेरणा का प्रभाव यह है कि बड़ी संख्या में लोग वृक्षारोपण और हरित वातावरण के निर्माण के लिए आगे आ रहे हैं।
न्यायेश्वर महादेव मंदिर का स्थापना दिवस इस बार केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला प्रेरणादायक आयोजन बनकर उभरा। कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी प्रदान किया।
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रिपोर्टर: अमित कुमार

