बंगाल में चुनाव से पहले बड़ी हलचल, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा, आरएन रवि बने नए गवर्नर
देश में संवैधानिक पदों पर बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने गुरुवार को 7 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में नई नियुक्तियों की घोषणा की। इस निर्णय के तहत कई राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों पर फेरबदल किया गया। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल (West Bengal) के राज्यपाल सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह तमिलनाडु (Tamil Nadu) के राज्यपाल रहे आरएन रवि (RN Ravi) को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में भी बदलाव:
नियुक्तियों की इस प्रक्रिया में लद्दाख (Ladakh) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता (Kavinder Gupta) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
इसके साथ ही दिल्ली (Delhi) के उपराज्यपाल रहे विनय कुमार सक्सेना (Vinai Kumar Saxena) को लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। इन बदलावों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी:
पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) के इस्तीफे और नई नियुक्ति को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) की ओर से उन्हें जानकारी दी गई कि आरएन रवि (RN Ravi) को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि इस निर्णय से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। उनके अनुसार यह केंद्र सरकार का एकतरफा फैसला है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा और प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
राज्यपाल सीवी आनंद बोस का कार्यकाल:
सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) ने 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान कई मुद्दों पर राज्य सरकार और राजभवन के बीच मतभेद सामने आए थे।
दूसरी ओर कवींद्र गुप्ता (Kavinder Gupta) ने 18 जुलाई 2025 को लद्दाख (Ladakh) के उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अब उन्हें हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है।
विश्वविद्यालय नियुक्तियों को लेकर विवाद:
सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2023 में विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर (Vice Chancellor) की नियुक्तियों को लेकर विवाद सामने आया था। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि कई विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां बिना राज्य सरकार की सलाह के की गई हैं।
राज्यपाल का कहना था कि कानून के अनुसार उन्हें यह अधिकार प्राप्त है। इस मुद्दे को लेकर मामला अदालत तक पहुंच गया और कुछ समय तक उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं।
विधेयकों की मंजूरी में देरी का आरोप:
वर्ष 2023 और 2024 के दौरान राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि कई राज्य विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने में देरी हो रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा बताया था।
हालांकि राज्यपाल की ओर से कहा गया कि किसी भी विधेयक पर निर्णय लेने से पहले उसकी संवैधानिक जांच करना आवश्यक है। इस मुद्दे के कारण राज्य सरकार और राजभवन के बीच संबंधों में तनाव की स्थिति देखने को मिली।
केंद्रीय योजनाओं और प्रशासनिक दौरों पर भी मतभेद:
वर्ष 2023 में राज्यपाल ने मनरेगा (MGNREGA) सहित कुछ केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इन योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की आवश्यकता बताई थी। राज्य सरकार ने इन टिप्पणियों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।
इसके अलावा राज्यपाल के जिलों के दौरे और आम जनता से सीधे संवाद को लेकर भी सरकार ने आपत्ति जताई थी। राज्य सरकार का कहना था कि यह समानांतर प्रशासन जैसा प्रतीत होता है, जबकि राज्यपाल ने इसे जनता से जुड़े रहने का संवैधानिक दायित्व बताया था।
अन्य आरोपों से भी बढ़ा विवाद:
वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल (West Bengal) के लोक भवन से जुड़े कुछ महिला कर्मचारियों द्वारा यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों का मामला भी सामने आया था। राज्य सरकार ने इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
हालांकि राज्यपाल सीवी आनंद बोस (CV Ananda Bose) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और इन्हें राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। यह मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा में रहा और राज्य सरकार तथा राजभवन के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
इन सभी घटनाओं के बीच अब नए राज्यपाल के रूप में आरएन रवि (RN Ravi) की नियुक्ति के बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति और प्रशासनिक समीकरणों पर नजर बनी हुई है।
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