नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को हालात उस समय बिगड़ गए जब भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हजारों युवाओं ने संसद भवन में घुसपैठ कर ली। इन्हें रोकने के लिए सेना और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। सेना ने कई राउंड फायरिंग की, जिसमें 9 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हुए। नेपाल के इतिहास में संसद परिसर में घुसपैठ का यह पहला मामला है।

आंसू गैस और पानी की बौछार के बाद फायरिंग
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, शुरुआत में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की, लेकिन स्थिति हाथ से निकलने लगी। प्रदर्शनकारी संसद के गेट नंबर 1 और 2 तक पहुंच गए और वहां कब्जा जमा लिया। नेपाल पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में करीब 12 हजार से ज्यादा युवा मौजूद थे। हालात काबू से बाहर होते देख सेना को बुलाना पड़ा और फायरिंग करनी पड़ी।
राजधानी में कर्फ्यू, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
हिंसक प्रदर्शन के बाद संसद भवन, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति आवास, प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। काठमांडू के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

सोशल मीडिया बैन से भड़का गुस्सा
बताया जा रहा है कि नेपाल सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाया था। सरकार का तर्क है कि इन प्लेटफॉर्म ने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण नहीं कराया। मंत्रालय ने 28 अगस्त को सात दिन की समय सीमा दी थी, जो 2 सितंबर को खत्म हो गई। टिकटॉक, वाइबर और कुछ अन्य प्लेटफॉर्म ने रजिस्ट्रेशन कर लिया, जबकि कई बड़े प्लेटफॉर्म ने ऐसा नहीं किया। यही प्रतिबंध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा कारण बना।
विदेश में बसे नेपाली भी प्रभावित
मंत्रालय के प्रवक्ता गजेंद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि जैसे ही कोई प्लेटफॉर्म रजिस्ट्रेशन पूरा करेगा, उसे बहाल कर दिया जाएगा। लेकिन इस फैसले से विदेशों में बसे लाखों नेपाली भी प्रभावित हुए हैं, जो रोजमर्रा की बातचीत और पारिवारिक संपर्क के लिए इन्हीं प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं। युवाओं का कहना है कि इस प्रतिबंध ने उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी और वैश्विक कनेक्टिविटी पर गहरी चोट की है।