Video: NEET पेपर लीक में NTA कनेक्शन! CBI जांच में बड़ा खुलासा
देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले में अब जांच की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस National Testing Agency (NTA) के अधिकारियों तक पहुंच गया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पेपर लीक की पूरी साजिश में NTA के एक अधिकारी की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि पुणे से गिरफ्तार ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे सीधे तौर पर NTA अधिकारी और अन्य आरोपियों के संपर्क में थी तथा उसे परीक्षा से करीब छह दिन पहले ही NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे।
NTA अधिकारी पर क्यों गहराया शक:
जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) इस बात की पड़ताल कर रही है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र मूल पेपर की फोटोकॉपी था या फिर किसी अन्य तरीके से उसकी तस्वीर लेकर बाहर पहुंचाया गया। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि NTA के जिस गोपनीय क्षेत्र में प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, वहां मोबाइल, कैमरा, ब्लूटूथ, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट यहां तक कि पेन तक ले जाने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में बिना अंदरूनी सहयोग के प्रश्नपत्र बाहर निकलना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इसी कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में विशेषज्ञ प्रोफेसर और लेक्चरर पेपर तैयार करते हैं, जबकि NTA अधिकारियों की जिम्मेदारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना होती है। इसी वजह से अब जांच एजेंसियां इस एंगल को गंभीरता से देख रही हैं कि कहीं अंदर मौजूद किसी अधिकारी की भूमिका तो नहीं रही।
डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश:
अब तक गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच में बड़े पैमाने पर डेटा डिलीट मिलने की बात सामने आई है। जांच में पाया गया कि कई आरोपियों ने चैट, फोटो गैलरी और जरूरी फाइलें हटाने की कोशिश की। मनीषा वाघमारे और दलाल धनंजय लोखंडे के मोबाइल से भी काफी डिजिटल डेटा गायब मिला है। CBI अब डिजिटल एविडेंस जुटाने में लगी हुई है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
मनीषा वाघमारे बनी अहम कड़ी:
CBI से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मनीषा वाघमारे ही वह व्यक्ति थी जो सबसे पहले पेपर सेट करने वाले एक्सपर्ट्स और NTA अधिकारी के संपर्क में आई। जांच में यह भी सामने आया कि उसी ने प्रोफेसर मनीषा मांधरे को छात्रों को बायोलॉजी के संभावित सवाल और जवाब पढ़ाने के लिए तैयार किया। वहीं, प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी ने केमिस्ट्री से जुड़े प्रश्न छात्रों को बताए।
बताया जा रहा है कि इस काम के बदले लाखों रुपये नकद और बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी को इससे जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन के प्रमाण भी मिले हैं। आरोप है कि जिन पेपरों से छात्रों को पढ़ाया गया था, उन्हें परीक्षा के बाद जला दिया गया ताकि कोई सबूत न बचे। इसके अलावा WhatsApp और Telegram चैट भी डिलीट कर दी गई थीं।
फिजिक्स पेपर को लेकर भी उठे सवाल:
इस पूरे मामले में अब तक केमिस्ट्री और बॉटनी से जुड़े प्रोफेसर गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल फिजिक्स विषय को लेकर है। जांच में सामने आया है कि कुल 720 अंकों में से करीब 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले लीक हुए थे। इनमें केमिस्ट्री के 45 में से 35 सवाल, बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और फिजिक्स के 15 सवाल मैच हुए बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फिजिक्स के प्रश्न किस माध्यम से बाहर पहुंचे। इसी कड़ी को जोड़ने में जांच एजेंसियां जुटी हुई हैं।
दोनों सेट लीक होने की आशंका:
जांच एजेंसियों को संदेह है कि NEET परीक्षा के दोनों सेट किसी न किसी स्तर पर लीक हुए। जानकारी के अनुसार, परीक्षा के लिए दो अलग-अलग सेट तैयार किए जाते हैं। एक सेट परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता है, जबकि दूसरा रिजर्व में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर बदलाव किया जा सके।
CBI को आशंका है कि दोनों सेटों के प्रश्नों को मिलाकर एक गेस पेपर तैयार किया गया। यही कारण माना जा रहा है कि कुछ सवाल और उनके विकल्प एक ही क्रम में दिखाई दिए, जबकि कुछ अलग क्रम में पाए गए। हालांकि, सवालों और विकल्पों की सामग्री एक जैसी बताई जा रही है।
कैसे तैयार होता है NEET का प्रश्नपत्र:
सूत्रों के अनुसार, NEET परीक्षा की प्रक्रिया जनवरी से शुरू हो जाती है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रश्नपत्र तैयार करने की आंतरिक प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जाती है और पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय माहौल में संपन्न होती है।
पेपर तैयार होने के बाद उसका 13 भाषाओं में अनुवाद किया जाता है। इसके बाद अप्रैल के मध्य तक प्रिंटिंग प्रक्रिया पूरी होती है और प्रश्नपत्रों को ट्रांसपोर्ट के जरिए विभिन्न बैंक लॉकरों में सुरक्षित रखा जाता है। परीक्षा के दिन इन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
जांच में सामने आया है कि 27 अप्रैल को ही प्रश्नपत्र लीक होकर मनीषा वाघमारे तक पहुंच चुका था, जबकि परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। इसके बाद पेपर कई स्तरों पर आगे पहुंचाया गया।
पेपर लीक के बाद NTA में बदलाव:
मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने NTA में बड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं। संस्था में दो नए Joint Secretary और दो Joint Director नियुक्त किए गए हैं। अनुजा बापट और रुचिता विज को Joint Secretary बनाया गया है, जबकि आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगड़िया को Joint Director की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को Appointment Committee of the Cabinet (ACC) की मंजूरी मिलने के बाद Department of Personnel and Training (DoPT) ने आदेश जारी किए।
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