नई दिल्ली (New Delhi) में नीट पेपर लीक मामले की जांच के दौरान देशभर में फैले एक संगठित नेटवर्क और कुछ कोचिंग संस्थानों की कथित भूमिका को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) स्थित प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकलने के बाद यह नेटवर्क राजस्थान (Rajasthan) के सीकर (Sikar) तक पहुंचा और फिर वहां से कई राज्यों में फैल गया। मामले में लगातार नए खुलासों के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नासिक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ पूरा मामला:
जांच एजेंसियों के अनुसार, नीट का प्रश्नपत्र सबसे पहले नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ। यहीं से पूरे नेटवर्क की शुरुआत मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर प्रश्नपत्र 30 से 40 लाख रुपये में बेचा गया और इस रकम को नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच बांटा गया।
जांच में यह भी सामने आया कि पेपर सीधे किसी एक राज्य में नहीं भेजा गया, बल्कि ट्रैकिंग से बचने के लिए अलग-अलग चरणों में इसकी सप्लाई की गई।
गुरुग्राम के रास्ते सीकर पहुंचा पेपर:
सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नपत्र पहले गुरुग्राम (Gurugram) पहुंचाया गया और वहां से राजस्थान के जमवारामगढ़ होते हुए सीकर लाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा रूट पहले से तय था और इसमें कई लोगों की भूमिकाएं अलग-अलग स्तर पर तय थीं।
सीकर को जांच में एक बड़े वितरण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। यहां से कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र को “गेस पेपर” और “प्रैक्टिस सेट” के नाम पर छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में कुछ कोचिंग संचालकों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
देश के कई राज्यों तक फैला नेटवर्क:
जांच एजेंसियों के अनुसार, सीकर से यह पेपर देहरादून (Dehradun), जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), बिहार (Bihar), केरल (Kerala) और उत्तराखंड (Uttarakhand) सहित कई राज्यों तक पहुंचाया गया। शुरुआती दौर में इसकी कीमत अधिक थी, लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती गई, इसकी कीमत घटती गई।
सूत्रों का दावा है कि कई छात्रों को इसे “लास्ट मिनट गेस पेपर” बताकर उपलब्ध कराया गया ताकि किसी को संदेह न हो।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला:
नीट पेपर लीक मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच चुका है। Federation of All India Medical Association ने याचिका दाखिल कर परीक्षा प्रणाली में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने, पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया गया है।
पुणे से महिला गिरफ्तार, कई लोग जांच के दायरे में:
मामले में जांच एजेंसियों ने कई लोगों को हिरासत में लिया है। पुणे (Pune) पुलिस द्वारा मनीषा वाघमारे नामक महिला को हिरासत में लेकर Central Bureau of Investigation को सौंपा गया है। इसके अलावा अहिल्यानगर से एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
जांच के दौरान कुछ आरोपियों के राजनीतिक और कोचिंग नेटवर्क से जुड़े होने की भी चर्चा सामने आई है। हालांकि एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।
एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल:
नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी परीक्षाएं आयोजित करने वाली National Testing Agency एक बार फिर विवादों में आ गई है। लगातार सामने आ रही तकनीकी गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है। पूर्व में गठित पैनलों द्वारा सुझाए गए कई सुधार अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं।
कोचिंग इंडस्ट्री और रिजल्ट की दौड़ पर चर्चा:
जांच एजेंसियों के अनुसार, मेडिकल कोचिंग इंडस्ट्री में बेहतर रिजल्ट की प्रतिस्पर्धा भी इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। सीकर जैसे शहरों में हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए पहुंचते हैं और इससे जुड़ा बड़ा आर्थिक ढांचा भी विकसित हो चुका है।
ऐसे में बेहतर परिणाम देने का दबाव कुछ संस्थानों को गलत रास्तों की ओर धकेल सकता है। हालांकि जांच एजेंसियां पूरे मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।
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