CJP Protest: न आंदोलनकारियों को बुलाया और न दिया कोई आश्वासन, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया रुख

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए उसकी ओर से न तो कोई निमंत्रण भेजा गया और न ही किसी प्रकार का आश्वासन दिया गया है। इसी बीच Parliament (संसद) भवन में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah (अमित शाह) के कार्यालय में करीब साढ़े तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक में मौजूदा स्थिति और संसद में अपनाई जाने वाली रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि आंदोलन में छात्रों की तुलना में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी अधिक है और विपक्ष के अलग-अलग रुख के कारण यह आंदोलन जल्द कमजोर पड़ सकता है।

सरकार ने बातचीत पर रखा अपना पक्ष:

नीट पेपर लीक मामले को लेकर सड़क से लेकर संसद तक जारी विरोध के बीच दिनभर सरकार के स्तर पर बैठकों का दौर चलता रहा। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बाद Cockroach Party (कॉकरोच पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल की पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda (जेपी नड्डा) से मुलाकात हुई। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पहल प्रदर्शनकारियों की ओर से की गई थी। एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, सरकार ने आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए न तो बुलाया था और न ही उन्हें किसी प्रकार का आश्वासन दिया गया।

अमित शाह के कार्यालय में हुई लंबी बैठक:

सोमवार को Parliament (संसद) भवन स्थित Amit Shah (अमित शाह) के कार्यालय में पूरे दिन राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। गृह मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan (धर्मेंद्र प्रधान) के बीच लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में आंदोलन की स्थिति और आगे की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान Piyush Goyal (पीयूष गोयल), Kiren Rijiju (किरण रिजिजू) सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक के बाद सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सतर्क नजर रखते हुए इंतजार की रणनीति अपनाई जाएगी।

संसद और राज्यों की स्थिति पर मंथन:

बैठक में आंदोलन के विभिन्न राज्यों में पड़ रहे प्रभाव और संसद के भीतर इस मुद्दे पर सरकार की रणनीति को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार, Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद आंदोलन के विस्तार की संभावना को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है। इसी क्रम में IB (आईबी) प्रमुख और गृह सचिव के बीच भी बैठक हुई, जिसमें सुरक्षा और हालात की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई।

राजनीतिक गतिविधियों पर सरकार की नजर:

बैठक के बाद एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है, जबकि वास्तविक छात्र नीट परीक्षा के बाद आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। सरकार का मानना है कि आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप और उसके प्रभाव का लगातार आकलन किया जा रहा है।

आंदोलन में फूट की चर्चाएं तेज:

आंदोलन के दौरान कथित मतभेदों और सोमवार को जुटी भीड़ को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। चर्चा यह भी रही कि प्रदर्शन स्थल पर भीड़ जुटाने में Aam Aadmi Party (आम आदमी पार्टी) की भूमिका रही, जबकि Congress (कांग्रेस) धरना स्थल से दूरी बनाए रही। हालांकि, इन चर्चाओं पर किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अभिजीत दिपके और मांगों पर उठे सवाल:

Cockroach Party (कॉकरोच पार्टी) के संस्थापक Abhijeet Dipke (अभिजीत दिपके) द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने के फैसले और Sonam Wangchuk (सोनम वांगचुक) की तीन प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं होने को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। सरकार से जुड़े सूत्रों का मानना है कि विपक्ष के अलग-अलग रुख और कथित आपसी मतभेद के कारण आंदोलन का प्रभाव आने वाले एक-दो दिनों में कम हो सकता है।

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