जन्मदिन पर देश को PM का तोहफा, बदल गया 70 साल का इतिहास

भारत में चीतों का इंतजार खत्म हो चुका है। करीब 11 घंटे का सफर करने के बाद चीते भारत पहुंच चुके हैं। पांच मादा और तीन नर चीतों को लेकर विमान ने नामीबिया की राजधानी होसिया से उड़ान भरी। मॉडिफाइड बोइंग 747 विमान से लाए गए इन चीतों में रेडियो कॉलर लगे हुए हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनमें से तीन चीतों को कूनो में बनाए गए विशेष बाड़ों में छोड़ देंगे। 

दो नर चीतों की उम्र साढ़े पांच साल है। दोनों भाई हैं। पांच मादा चीतों में एक दो साल, एक ढाई साल, एक तीन से चार साल तो दो पांच-पांच साल की हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीतों को पिंजरों से मुक्त करने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि चीते हमारे मेहमान हैं। उन्हें देखने के लिए कुछ समय धैर्य रखना होगा।  

नामीबिया से भारत लाए गए चीतों को प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में बॉक्स खोलकर तीन चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। बाद में मोदी ने इनकी तस्वीरें भी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी साथ थे। 

प्रधानमंत्री मोदी भी कूनो नेशनल पार्क पहुंच गए हैं। सुबह 10.30 बजे वे मोदी कूनो पहुंचे। सुबह 10 बजे चिनूक हेलीकॉप्टर से चीतों को यहां लाया गया। प्रधानमंत्री ने तीन चीतों को कूनो नेशनल पार्क में बनाए गए विशेष बाड़े में छोड़ा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र 72 वर्ष के हो गये। देशभर में इसे सेवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें रक्तदान शिविर, कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव, पौधरोपण कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान शामिल है। 

प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। पिता दामोदर दास मूलचंद मोदी और मां का नाम हीराबेन है। मोदी पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन काफी रोचक रहा है। आज हम उनसे जुड़ी 10 खास बातें बताने जा रहे हैं, जो बहुत कम ही लोगों को पता है।

1. पीएम मोदी के बचपन का नाम
प्रधानमंत्री मोदी के पिता दामोदर दास मूलचंद मोदी की वडनगर स्थित रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी। मोदी के बचपन का नाम नरिया था। हर कोई प्यार से उन्हें नरिया कहकर बुलाता था। वह वडनगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे। 

2. अभिनय का शौक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बचपन में अभिनय का शौक रहा है। 2013 में मोदी पर लिखी गई किताब ‘द मैन ऑफ द मोमेंट : नरेंद्र मोदी’ के मुताबिक जब वह 13-14 साल के थे, तब उन्होंने स्कूल के लिए फंड जुटाने के लिए स्कूल के बाकी बच्चों के साथ एक नाटक में हिस्सा लिया था। ये नाटक गुजराती में थी। इसका नाम पीलू फूल था, जिसे हिंदी में पीले फूल कह सकते हैं।  

3. संन्यासी बनने के लिए घर से भागे थे
स्कूल की पढ़ाई खत्म होते ही प्रधानमंत्री मोदी संन्यासी बनने के लिए घर से भाग गए थे। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित देश के कई जगहों पर गए। हिमालच में कई दिन तक साधु संतों के साथ रहे। तब उन्हें संतों ने कहा कि राष्ट्र की सेवा बगैर संन्यास धारण किए भी की जा सकती है। इसके बाद वह वापस गुजरात पहुंचे और उन्होंने संन्यास धारण करने का फैसला त्याग दिया।  

4. बचपन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे
नरेंद्र मोदी बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़ गए थे। 1958 में दिवाली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलाई थी। मोदी संघ के कार्यक्रमों में प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाते थे। आरएसएस नेताओं के ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास था। 

5. समय के पाबंद, केवल चार घंटे की नींद लेते हैं
प्रधानमंत्री मोदी समय के बहुत पाबंद हैं। तय समय पर ही वह सारे काम करने की कोशिश करते हैं। वह केवल चार घंटे की नींद लेते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए नियमित योग करते हैं। इसके अलावा ध्यान भी नियमित करते हैं। 

6. पतंगबाजी का शौक
मोदी को पतंगबाजी का काफी शौक है। गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए वह मकर संक्रांति पर बड़ी पतंगबाजी प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाते थे। जो आज भी जारी है। इस कार्यक्रम में उन्होंने एक बार अभिनेता सलमान खान को भी आमंत्रित किया था। 

7. खुद बनाते थे खाना, साफ-सफाई भी करते थे
संघ में प्रचारक रहने और फिर मुख्यमंत्री बनने के बाद तक नरेंद्र मोदी अपना काम खुद से ही करते थे। वह खुद से अपने लिए खाना बनाते थे। अहमदाबाद संघ कार्यालय में रहने के दौरान वह खुद और दूसरों के लिए रोज चाय बनाते थे। साफ-सफाई भी करते थे। इसके अलावा बुजुर्ग स्वयंसेवियों के कपड़े भी मोदी ही साफ करते थे। 

8. इमरजेंसी में सरदार बन गए थे मोदी
1975 में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो मोदी युवा अवस्था में थे। उस दौरान संघ के स्वयंसेवी के तौर पर उन्होंने इसका विरोध किया। इस दौरान पुलिस से बचने के लिए उन्होंने सरदार का रूप धारण कर लिया था। इसके जरिए ढाई साल तक वह पुलिस को छकाते रहे। 

9. कोई नशा नहीं करते
पीएम मोदी ने युवा अवस्था के दौरान नशे के खिलाफ अभियान भी चलाया था। कहा जाता है कि आज तक उन्होंने सिगरेट, शराब को हाथ तक नहीं लगाया। मोदी पूरी तरह से शाकाहारी हैं। 

10. और बन गया मोदी ब्रांड कुर्ता
नरेन्द्र मोदी जब संघ में थे, तभी से कुर्ते की बांह को छोटी करवा लेते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे कुर्ता ज्यादा गंदा नहीं होता था और आरामदायक भी रहता था। आज वही कुर्ता मोदी ब्रांड बन गया है।

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