क्या? गाजीपुर में मुख़्तार का आगमन…

गाजीपुर | किसी ने मुझसे कहा कि इश्वर के लिए किये गए आस्था पर और योगी सरकार के कानून व्यवस्था पर कभी संदेह नहीं करते. लेकिन बात कानून व्यवस्था की नहीं बात कोर्ट के आदेश की है और कोर्ट के आदेश पर पूर्व विधायक और कानून की किताब में माफिया की उपाधि प्राप्त मुख्तार अंसारी को गाजीपुर आना होगा. मुख़्तार अंसारी के इस मामले के बारे में भी बतायेंगें, लेकिन उसके पहले गाजीपुर से कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर आ गई. जिला जेल के दो बंदी रक्षक धरने पर बैठे हैं।धरने पर बैठे बंदी रक्षकों ने जेल अधीक्षक पर गलत तरीके से ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है।इस दौरान बंदी रक्षकों ने जेल अधीक्षक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहाकि जेल के अंदर जेल मैन्युअल पालन नही किया जा रहा है। मोबाइल, गुटका, सिगरेट, पनीर इत्यादि मिल रहा है.

ये खबर आते ही लोगों ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता. जेल में तो अपराधियों को रखा जाता है. अगर उन्हें सभी सुविधा मिलेगी तो फिर सजा कैसी? खैर किसी ने सुझाव दिया की सरकार को जेल में एक्टिव मोबाइल का डाटा निकाल लेना चाहिए. सब दूध का दूध और पानी पानी का पानी हो जायेगा. खैर बंदी रक्षकों के आरोपों को जेल अधीक्षक ने सभी आरोपो को सिरे से खारिज करते हुए कहाकि दिनों बंदी रक्षक अनर्गल और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।जेल अधीक्षक ने कहाकि दोनों बंदी रक्षकों का आचरण बेहद अनुशासनहीन और खराब रहा है।उन्होंने कहाकि दोनों बंदी रक्षकों पर कई बार दंडात्मक कार्यवाही भी हो चुकी है।उन्होंने कहाकि की दोनो बंदी रक्षक अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए ऐसा कृत्य करते रहे हैं।

अब लोगों ने कहा कि इसपर तो सरकार को जाँच बैठानी चाहिए. अगर इसपर चुप्पी बनी रहेगी तो पक्का दाल में कुछ काला है. खैर आते हैं मुख़्तार अंसारी की खबर पर.

अपर सत्र न्यायाधीश /एमपी/ एमएलए कोर्ट दुर्गेश की अदालत में 21 वर्ष पुराने बहुचर्चित मुहम्मदाबाद कोतवाली के उसरी चट्टी हत्याकांड में अभियोजन की तरफ से मंगलवार को गवाह इजराइल अंसारी का बयान दर्ज हुआ। आरोपियों के अधिवक्ता द्वारा जिरह भी अंकित किया गया। 20 दिसंबर को अगली तिथि नियत की गई है। साथ ही मुख्तार अंसारी का बयान कराने के लिए न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि वादी मुकदमा मुख्तार अंसारी को व्यक्तिगत रूप से 20 दिसंबर को न्यायालय में उपस्थित करें।

आदेश की एक प्रति जिला कारागार बांदा को भेजने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि नियत तिथि पर किसी प्रकार का स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा। मालूम हो कि 15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ जा रहे थे। दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब उसरी चट्टी पर उनके काफिले पर पहले से तैयार हमलावरों ने स्वचलित हथियारों से फायरिंग की।

इसमें मुख्तार अंसारी के सरकारी गनर रामचंदर उर्फ प्रदीप की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं रुस्तम उर्फ बाबू घायल हुआ था। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई थी। हमलावरों में से एक मारा गया था। मुख्तार अंसारी के साथ चलने वाले हमराहियों को भी चोट आई थीं। इस मामले में मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह को नामजद करते अन्य 15 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने चार लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया था, जिसमें से दो आरोपी की विचारण के दौरान मौत हो गई थी।

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