Lucknow | सपा के कद्दावर नेता आज़म खान की राजनीति और रसूख को झकझोर देने वाले IAS अधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह अब उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक पारी को विराम देकर अपने मूल कैडर सिक्किम लौट रहे हैं। यूपी सरकार ने उन्हें मुरादाबाद मंडलायुक्त के पद से रिलीव कर दिया है। केंद्र सरकार ने उनका सातवां एक्सटेंशन मंजूर नहीं किया।
योगी के भरोसेमंद, 6 बार मिला एक्सटेंशन
आन्जनेय सिंह 2005 बैच के सिक्किम कैडर के IAS अफसर हैं। मूल रूप से यूपी के मऊ जिले के निवासी आन्जनेय 2015 में सपा शासनकाल में प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए थे। योगी सरकार में उन्हें भरोसेमंद अधिकारियों की लिस्ट में गिना गया। यही वजह थी कि केंद्र ने राज्य सरकार की सिफारिश पर उन्हें लगातार 6 बार एक्सटेंशन दिया—4 बार एक-एक साल का और 2 बार 6-6 महीने का। हालांकि, इस बार सातवां एक्सटेंशन नहीं मिल सका।

रामपुर में कार्रवाई से हिली आज़म की सल्तनत
19 फरवरी 2019 को आन्जनेय सिंह को रामपुर का जिलाधिकारी बनाया गया। यहीं से उनकी पहचान आज़म खान के ‘किले को ढहाने वाले अफसर’ के रूप में बनी। उन्होंने जिले में कई कड़े फैसले लिए।
- उर्दू गेट तोड़ा – PWD रोड पर बने अवैध उर्दू गेट को हटवाकर रास्ता खाली कराया।
- बिजलीघर मुक्त कराया – जौहर यूनिवर्सिटी की चारदीवारी में कैद सरकारी सबस्टेशन को कब्जे से छुड़वाया।
- स्कूल हटवाया – यूनानी चिकित्सालय की जमीन पर बने रामपुर पब्लिक स्कूल को सील कराकर जमीन कब्जामुक्त कराई।
इन सख्त कार्रवाइयों ने आज़म खान को सीधे चुनौती दी।
हेट स्पीच केस और सजा
लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान आज़म खान ने रामपुर की सभा में आन्जनेय को लेकर विवादित भाषण दिया था। उन्होंने कलेक्टर को निशाना बनाते हुए अपमानजनक बातें कहीं। प्रशासन ने इस भाषण की वीडियोग्राफी कराई और FIR दर्ज कराई। इसी केस में बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट ने आज़म को 3 साल की सजा सुनाई, जिसके चलते उनकी विधायकी चली गई।
98 मुकदमे और भू-माफिया का टैग
डीएम रहते आन्जनेय ने आज़म खान के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार तेज कर दी। देखते ही देखते अलग-अलग थानों में आज़म पर 98 मुकदमे दर्ज हो गए। सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामले में उन्हें भू-माफिया घोषित किया गया। जौहर यूनिवर्सिटी की चारदीवारी में कैद 172 एकड़ जमीन प्रशासन ने आज़म से छीन ली।
अब्दुल्ला आज़म की विधायकी भी गई
सिर्फ आज़म खान ही नहीं, बल्कि उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को भी आन्जनेय की कार्रवाई से झटका लगा। जांच में सामने आया कि अब्दुल्ला ने चुनाव के समय फर्जी आयु प्रमाण पत्र लगाया था। DM की रिपोर्ट पर निर्वाचन आयोग ने उनकी विधायकी भी रद्द कर दी।
कैडर नियम और वापसी
नियमों के मुताबिक, कोई भी IAS अधिकारी अधिकतम 5 साल तक ही प्रतिनियुक्ति पर रह सकता है। विशेष परिस्थितियों में ही कैडर बदलने की अनुमति मिलती है। 14 अगस्त को आन्जनेय की एक्सटेंशन अवधि खत्म हो गई। वह मुरादाबाद कमिश्नर का चार्ज अनुज सिंह को देकर अवकाश पर चले गए। अब 60 दिन का छुट्टी काल पूरा करने के बाद वे सिक्किम लौटेंगे।
आन्जनेय सिंह का कार्यकाल यूपी में हमेशा सख्त प्रशासनिक फैसलों और निर्भीक कार्रवाई के लिए याद किया जाएगा। रामपुर में उनकी तैनाती ने आज़म खान की राजनीतिक सल्तनत को हिलाकर रख दिया और एक दौर का अंत कर दिया। अब वे सिक्किम लौट रहे हैं, लेकिन यूपी में उनका नाम एक ऐसे अफसर के तौर पर दर्ज हो गया है जिसने रसूखदार नेताओं के सामने झुकने के बजाय कानून का पक्ष लिया।