रिपोर्टर: सऊद अंसारी
18 दिसंबर को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर मदरसा मिस्बाहुल उलूम (Madrasa Misbahul Uloom), देवा शरीफ (Deva Sharif), बाराबंकी (Barabanki) में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और मदरसा प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर अल्पसंख्यक अधिकारों के महत्व, उनके संरक्षण और सामाजिक समरसता पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज में अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

अल्पसंख्यक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य मोहम्मद वाजिद सिद्दीकी (Mohammad Wajid Siddiqui), मदरसा मिस्बाहुल उलूम (Madrasa Misbahul Uloom), देवा शरीफ (Deva Sharif), बाराबंकी (Barabanki) ने अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के ऐतिहासिक और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक, शैक्षिक और धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन अधिकारों को समझने और समाज में सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

ग़ज़ल और विचारों से सजा मंच:
कार्यक्रम के दौरान मोहम्मद समी (Mohammad Sami), स0अ0 आलिया ने ग़ज़ल प्रस्तुत कर वातावरण को भावनात्मक और प्रेरणादायक बनाया। ग़ज़ल के माध्यम से उन्होंने अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों की भूमिका और उनके अधिकारों पर अपने विचार रखे, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
तक़रीरों में उभरा जागरूकता का संदेश:
इस अवसर पर मोहम्मद सलीम (Mohammad Salim), प्र0अ0 फौकानिया ने भी तक़रीर करते हुए अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही अधिकारों की सही समझ विकसित की जा सकती है और मदरसों की भूमिका इसमें अहम है। उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की जानकारी रखने और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।
सफल संचालन और सहभागिता:
कार्यक्रम का संचालन इकरामुल्लाह (Ikramullah), स0अ0 आलिया द्वारा किया गया। उनके संचालन में कार्यक्रम सुचारु रूप से आगे बढ़ा और सभी वक्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों और छात्रों ने भी ध्यानपूर्वक वक्तव्यों को सुना और अल्पसंख्यक अधिकारों के प्रति अपनी समझ को और मजबूत किया।
शैक्षिक संस्थानों की भूमिका पर जोर:
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शैक्षिक संस्थान समाज में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम हैं। मदरसा मिस्बाहुल उलूम (Madrasa Misbahul Uloom) में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल अल्पसंख्यक अधिकार दिवस को मनाने तक सीमित रहा, बल्कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना को भी मजबूत करता नजर आया।
कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संदेश के साथ हुआ, जिसमें सभी ने आपसी भाईचारे, समानता और अधिकारों के सम्मान को बनाए रखने का संकल्प लिया।
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