बाराबंकी के देवा शरीफ स्थित मदरसा मिस्बाहुल उलूम (Madrasa Misbahul Uloom, Deva Sharif, Barabanki) में भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद (Maulana Abul Kalam Azad) की जयंती 11 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से की गई, जिसके बाद छात्रों ने नात पाक पेश कर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। मदरसे के छात्र-छात्राओं ने मौलाना आजाद के जीवन और उनके विचारों पर हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में भाषण दिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ और मुख्य आकर्षण:
कार्यक्रम की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से हुई, इसके बाद मदरसे के छात्रों द्वारा नात पाक प्रस्तुत किया गया। उपस्थित छात्र-छात्राओं ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के जीवन, संघर्ष और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मौलाना आजाद ने शिक्षा के क्षेत्र में देश को नई दिशा देने का कार्य किया और स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई।
प्रधानाचार्य का संबोधन:
मदरसा मिस्बाहुल उलूम के प्रधानाचार्य मोहम्मद वाजिद सिद्दीकी (Mohammad Wajid Siddiqui) ने अपने संबोधन में कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान, कवि, लेखक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के प्रबल समर्थक थे और भारत की आज़ादी की लड़ाई में उन्होंने अहम योगदान दिया। वर्ष 1923 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने। आज़ादी के बाद वे उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और देश के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
मौलाना आजाद का योगदान:
प्रधानाचार्य ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मौलाना आजाद को कई बार जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। 1912 में उन्होंने एक उर्दू पत्रिका अल-हिलाल (Al-Hilal) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जागृत करना और हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना था। मौलाना आजाद का मानना था कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है। उन्होंने शिक्षा को समाज के विकास की रीढ़ माना और आज़ाद भारत की शिक्षा नीति की नींव रखी।
कार्यक्रम का संचालन और उपस्थित लोग:
कार्यक्रम का संचालन इकरामुल्लाह स0अ0 आलिया (Ikramullah S.A. Alia) द्वारा किया गया। इस अवसर पर मोहम्मद समी, सलीमुद्दीन, मोहम्मद अनीस, इम्तियाज अहमद, मोहम्मद कफील, मोहम्मद सलीम सहित सभी शिक्षकगण मौजूद रहे। सभी ने मौलाना आजाद के आदर्शों को अपनाने और शिक्षा को समाज की प्रगति का माध्यम बनाने का संकल्प लिया।
समापन:
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का यह आयोजन छात्रों में शिक्षा के महत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जगाने वाला साबित हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने मौलाना आजाद के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
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