मऊ में भाजपा जिलाध्यक्ष समेत तीन पर दर्ज मुकदमे के 24 घंटे में रद्द होने पर उठे सवाल …
मऊ (Mau) जनपद में न्यायालय के आदेश पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य (Ramashray Maurya) समेत तीन लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को पुलिस द्वारा महज 24 घंटे के भीतर जांच के बाद खारिज किए जाने का मामला चर्चा में है। इतनी कम अवधि में जांच पूरी कर एफआईआर (FIR) समाप्त किए जाने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या किसी सामान्य नागरिक के मामले में भी इतनी तेजी से जांच पूरी कर राहत मिल सकती है।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा:
मामला हलधरपुर थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव से जुड़ा है। यहां प्रधानी चुनाव की कथित रंजिश को लेकर विवाद के बाद गांव निवासी अजीत सिंह की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट, मऊ (Mau) ने 12 अगस्त 2026 को थानाध्यक्ष हलधरपुर को अभियोग पंजीकृत करने का आदेश दिया था।
प्रार्थना पत्र में वर्तमान भाजपा (BJP) जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य (Ramashray Maurya) समेत तीन अन्य लोगों पर घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, कपड़े फाड़ने और जान से मरवाने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अजीत सिंह और रामाश्रय मौर्य के बीच प्रधानी चुनाव को लेकर पुरानी रंजिश चली आ रही है।
24 घंटे के भीतर पुलिस ने पूरी की जांच:
अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस की ओर से मामले की जांच और साक्ष्य संकलन किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सत्य नहीं पाए गए। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामला फर्जी पाया गया, जिसके बाद इसे समाप्त किया जा रहा है।
इस कार्रवाई को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि न्यायालय के आदेश पर दर्ज मुकदमों में सामान्य तौर पर पुलिस द्वारा शिकायत से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की जाती है। ऐसे में इस मामले में 24 घंटे के भीतर जांच पूरी किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस ने आरोपों को बताया असत्य:
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हलधरपुर थाने में भाजपा (BJP) के मऊ (Mau) जिलाध्यक्ष के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके अनुसार मामले की तत्परता से जांच की गई और इस दौरान जुटाए गए साक्ष्यों में आरोप पूरी तरह फर्जी पाए गए।
पुलिस अधिकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने अपने कुटीर उद्योग की जांच कराए जाने का भी आरोप लगाया था। इसके अलावा मारपीट और गाली-गलौज के आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ये आरोप सत्य नहीं पाए गए, जिसके आधार पर मामले को समाप्त किया जा रहा है।
प्रधानी चुनाव की पुरानी रंजिश का मामला:
शिकायत में प्रधानी चुनाव को लेकर पुरानी रंजिश का उल्लेख किया गया है। अजीत सिंह की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि इसी विवाद के चलते उनके साथ घर में घुसकर मारपीट और गाली-गलौज की गई तथा कपड़े फाड़ने और जान से मरवाने की धमकी दी गई।
हालांकि पुलिस जांच के बाद इन आरोपों को सत्य नहीं पाए जाने की बात कही गई है। इस तरह एक ही मामले में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने और उसके बाद पुलिस जांच में आरोपों के असत्य पाए जाने को लेकर मामला चर्चा में बना हुआ है।
पुलिस की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल:
मामले को लेकर स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों के बीच यह चर्चा है कि आम नागरिकों से जुड़े मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया में लंबा समय लगने की स्थिति सामने आती है, जबकि इस मामले में 24 घंटे के भीतर जांच पूरी कर एफआईआर समाप्त किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई और इसी आधार पर कार्रवाई की गई। ऐसे में मामले से जुड़े आरोपों और पुलिस की जांच के बीच सामने आए अंतर को लेकर बहस जारी है।
अजय सिंह से जुड़े विवाद का भी उल्लेख:
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अजीत सिंह और उनके भाई अजय सिंह के बीच भी विवाद रहता है। अधिकारी के अनुसार अजय सिंह की ओर से भाजपा (BJP) जिलाध्यक्ष के खिलाफ मीडिया में दुष्प्रचार किए जाने और कई वीडियो डाले जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार इन मामलों की भी जांच चल रही है और उन पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायालय के आदेश पर दर्ज मुकदमे, पुलिस जांच और एफआईआर समाप्त किए जाने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा को बढ़ा दिया है। फिलहाल पुलिस का पक्ष है कि साक्ष्यों के आधार पर लगाए गए आरोप सत्य नहीं पाए गए, जबकि शिकायत से जुड़े पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों के कारण मामला चर्चा में है।
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