महराजगंज पेट्रोल पंप लूट कांड में 12 साल बाद फैसला

महराजगंज (Maharajganj) के चर्चित पेट्रोल पंप लूट कांड में करीब एक दशक बाद न्यायिक फैसला सामने आया है। अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने इस मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2013 का है, जब हथियारबंद बदमाशों ने पेट्रोल पंप पर हमला कर नकदी लूट ली थी। अदालत के इस फैसले को लंबे समय से चले आ रहे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दस साल का कठोर कारावास और अर्थदंड:
अदालत ने आरोपी अजय यादव को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं। सजा सुनाते समय अदालत ने मामले की गंभीरता और घटना की प्रकृति को ध्यान में रखा।

2013 की रात हुई थी वारदात:
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 26 अक्टूबर 2013 की रात लगभग 1:10 बजे की है। महराजगंज (Maharajganj) स्थित डॉल्फिन सर्विस सेंटर (Dolphin Service Center) पेट्रोल पंप पर उस समय सामान्य कामकाज चल रहा था। पेट्रोल पंप पर मौजूद कर्मचारियों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में लूट की बड़ी वारदात होने वाली है।

पेट्रोल भरवाने के बहाने पहुंचे बदमाश:
शिकायत के मुताबिक दो मोटरसाइकिलों पर सवार कुल छह युवक पेट्रोल पंप पर पहुंचे। उन्होंने एक हजार रुपये का पेट्रोल भरवाया। जब कर्मचारियों ने भुगतान की मांग की तो स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोपियों ने पेट्रोल पंप पर कार्यरत दुर्गेश यादव, सेल्समैन संजय और वहां मौजूद तीन ट्रक चालकों के साथ मारपीट शुरू कर दी।

कैश काउंटर तोड़कर लूटे एक लाख रुपये:
मारपीट के बाद बदमाशों ने कैश काउंटर का दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने वहां रखी लगभग एक लाख रुपये की नकदी लूट ली। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पूरी वारदात से पेट्रोल पंप कर्मचारियों में दहशत फैल गई थी।

पुलिस में दर्ज हुई थी तहरीर:
घटना के तुरंत बाद थाना नंदगंज (Nandganj) क्षेत्र के हरपॉली गांव निवासी दुर्गेश यादव ने कोतवाली में तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

जांच में आरोपी की हुई पहचान:
जांच के दौरान पुलिस ने वाराणसी (Varanasi) के चांदपुर, थाना मड़ुवाडीह (Maduwadiya) निवासी अजय यादव को गिरफ्तार किया। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया और उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।

गवाहों और दलीलों के बाद फैसला:
मामले की सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता नीरज श्रीवास्तव ने अदालत के समक्ष कुल छह गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव:
करीब दस साल पुराने इस मामले में आया फैसला पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि गंभीर अपराधों में कानून के तहत दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया भले ही समय ले, लेकिन न्यायिक व्यवस्था अपना काम करती है।


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