महाकुम्भ : आस्था से रोजगार की अद्भुद कहानी…

महाकुम्भ का इतिहास पुराना, ये केवल नदियों का संगम नहीं बल्कि आस्था और विभिन्न स्थानीय संस्कृतियों का भी संगम है। कुछ दर्द भरी दास्तां है तो भेदभाव के अनगिनत दर्द पर मरहम है। महाकुम्भ के सकारत्मक तस्वीरों ने एकता के उस दृश्य को इस पवित्र धरा पर कुरेदा है जहाँ भेदभाव और ऊँच की भावना ख़त्म हो जाती है, इस संगम धारा में सामाजिक कुरीतियाँ बह जाती हैं और मन पवित्र होकर भारतीय संस्कृति के उस अद्भुद वातावरण में सैर करता है जहाँ जाति नहीं पूछी जाती बस आस्था और आस्थावान का पवित्र समाज रहता है। धन्य है ये धरा, धन्य है संगम की धारा, जहाँ एक नहीं तीन माताओं ने जन जन को है दुलारा।

सवाल कई हैं और सवालों पर बहस भी हो सकता है लेकिन आस्था से भरपूर मानस के निगाहों से दिखने वाले महाकुम्भ की तस्वीर उसके मस्तिस्क में सदेव के लिए जिवंत हो गयी। महाकुंभ ने दुनिया को आस्था और आर्थिकी का बेहतर समन्वय दिया है। ऐसा कहीं नहीं होता कि किसी शहर के विकास पर साढ़े 7 हजार करोड़ खर्च करें, उससे उस प्रदेश की अर्थव्यवस्था साढ़े 3 लाख करोड़ बढ़ जाए। ऐसा दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलता, लेकिन महाकुंभ ने ये करके दिखाया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने ये बयान महाकुंभ के समापन के दूसरे दिन 27 फरवरी का है। खबर के अनुसार आर्थिक विशेषज्ञ भी गिनाते हैं कि महाकुंभ में आए 66 करोड़ श्रद्धालुओं और उन्होंने औसतन 5 हजार रुपए खर्च किए, इस हिसाब से यह कुल 3.30 लाख करोड़ होता है। अनुमान के मुताबिक खबर आई कि महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं ने परिवहन पर 1.50 लाख करोड़ खर्च किए। इसी तरह खानपान पर 33 हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च किया।

महाकुम्भ ने आमजन को केवल आस्था से नहीं जोड़ा बल्कि व्यवस्थाओं से लेकर रोजगार के अद्भुद अवसर दिये, इस दौरान एक सामान्य व्यक्ति भी व्यापारी बन गया। प्रयागराज में 200 से ज्यादा होटल, 204 गेस्ट हाउस और 90 से ज्यादा धर्मशालाएं हैं, जिसकी खूब कमाई हुई तो वहीँ 50 हजार से ज्यादा लोगों ने अपने घरों को होम-स्टे में बदल दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने बताया है कि महाकुंभ से पहले हमने अनुमान लगाया था कि होटल इंडस्ट्री का कारोबार 2500-3000 करोड़ रुपए का होगा, लेकिन महाकुंभ खत्म होने तक इसका कारोबार 40 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। होटल के अंदर जो कमरे 3 हजार के थे, उन्हें 15-15 हजार रुपए तक में दिया गया। स्टेशन के पास जो कमरे 500-700 रुपए में मिल जाते थे, इस बार 4000-5000 में दिए गए। कुंभ में डोम सिटी बनाई गई। इसका 1 लाख से ज्यादा किराया रहा और फुल बुकिंग रही।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज पहुंचने के कुल 7 रास्ते हैं और हर रास्ते पर टोल प्लाजा स्थित है। जो भी लोग आपनी गाड़ियों से महाकुंभ आए, उन सभी ने टोल टैक्स भरा। रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज-मिर्जापुर मार्ग पर विंध्याचल में जो टोल प्लाजा है, उस रास्ते से करीब 70 लाख गाड़ियां गुजरीं। जिसकी वजह से 50 करोड़ रुपए का राजस्व टोल प्लाजा को मिला। इसी तरह प्रयागराज-रीवा, प्रयागराज-चित्रकूट, प्रयागराज-कानपुर, प्रयागराज-लखनऊ मार्ग पर भी टोल प्लाजा हैं और वहां से भी मुनाफा हुआ। लखनऊ-प्रयागराज मार्ग पर तो 3 टोल प्लाजा हैं। इस टोल पर एक कार वाले को करीब 350 रुपए देने पड़े। रिपोर्ट के अनुसार इस हिसाब से करीब 300 करोड़ रुपए सिर्फ टोल प्लाजा को मिले।

महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी से हुई लेकिन इसके पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकुम्भ पहुंचने लगे। कुंभ का पहला हफ्ता उम्मीद पर खरा उतरा। दूसरे हफ्ते यानी 21 जनवरी से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भीड़ इतनी ज्यादा हो गयी कि 21 से 29 जनवरी तक तो प्रशासन के लिए भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल सा हो चला। हर तरफ केवल भीड़ ही भीड़, आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा और होने लगी धन की बारिश। इस दौरान खाने-पीने की दुकानों से लेकर ट्रैवल्स, नाव और होटल इंडस्ट्री में तेजी से उछाल आया। इस व्यवसाय से करीब 3 लाख लोग जुड़े थे। इन सभी को उम्मीद से ज्यादा मुनाफा हुआ। लेकिन 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर भीड़ ने अपना सब्र तोड़ दिया और भगदड़ की खबर आई। रिपोर्ट के अनुसार 29 जनवरी से लेकर 5 फरवरी तक लगा कि दुकानदारों अपनी लागत निकालना मुश्किल होगा, लेकिन उसके बाद सकारात्मक सन्देश ने आस्था की निष्ठा को मजबूत कर दिया और भीड़ ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

यही नहीं महाकुम्भ के दौरान मेला प्राधिकरण को केवल जमीन अलोटमेंट से करीब 44 करोड़ से ज्यादा मिल गये। रिपोर्ट के अनुसार एडवर्टाइजमेंट से ₹13,40,82,555, मनोरंजन जोन से ₹10,32,50,000, एक्टिविटी जोन से ₹5,30,55,750, परमानेंट शॉप से ₹4,81,91,202, पार्किंग से ₹4,28,73,400, फूड कोर्ट से ₹3,10,02,022, फूड स्टॉल से ₹70,66,867, मिल्क बूथ से
₹70,66,867, किला घाट वेंडिंग जोन से ₹2,02,96,000 प्राप्त हुए, इस हिसाब से कुल ₹44,97,98,960 मेला प्राधिकरण को प्राप्त हुए।

अब समझिये कि महाकुम्भ में एक श्रद्धालु ने कितना खर्च किया होगा?

रिपोर्ट के अनुसार यदि एक व्यक्ति दिल्ली से ट्रेन के जरिए है तो उसका औसत खर्च
■ यात्रा: 1000
■ खाना: 500
■ रहना: 1000

यदि दिल्ली से हवाई जहाज से आए व्यक्ति का खर्च
■ यात्रा: 20,000
■ खाना: 5,000
■ रहना: 5,000

यदि दिल्ली से निजी वाहन से आए एक व्यक्ति का खर्च
■ यात्रा: 4,000
■ खाना: 1,000
■ रहना: 2,000

अब समझते हैं कि आखिर 3 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था कैसे बनी?

मीडिया रिपोर्ट कहती है कि एक्सपर्ट के अनुमान के मुताबिक होटल आदि पर 40,000 करोड़, टोल टैक्स पर 300 करोड़, खाना पीना पर 33,000 करोड़, परिवहन (रोड, हवाई, नाव, लोकल) पर 1.5 लाख करोड़, पूजन सामग्री पर 20,000 करोड़, दान के जरिये 660 करोड़ और अन्य चीजों पर 66000 करोड़ प्राप्त हुए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार योजना विभाग के प्रमुख सचिव अलोक कुमार का कहना है कि नगर विकास विभाग ने 22 टीमों से स्टडी कराई है। उनसे पूरा डाटा लिया जाएगा। टोल प्लाजा, यूपीआई से पेमेंट का डाटा, मेला अथॉरिटी समेत कुंभ से जुड़ी सभी संस्थाओं से डाटा लिया जाएगा। आंकलन के बाद ही पता चलेगा कुंभसे यूपी की इकोनॉमी को कितना फायदा हुआ।

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