Mahakumbh 2025: “क्या नौकरी बचाने के लिए अपनों की मौत स्वीकार है? क्या लाशों को देख कलेजा नहीं फटता? क्या नौकरी इतनी प्यारी है कि अत्याचार को होने दिया और अत्याचार को बढ़ने दिया जाए? क्या यही असल देश भक्ति है? क्या यही सनातन का संस्कार है? लाशें गिरती रहीं और झूठ बढ़ता रहा! किसी को सत्ता का स्वार्थ था, किसी को मोटा विज्ञापन तो किसी को मोटी तनख्वा की लालच थी! अब तो खून से सने तनख्वा से बच्चे भी पलेंगें और हम सच्चे भी बनेगें!”
ये बातें मुझे सोने नहीं दे रहीं हैं, जब आँखे बंद करूं तो ऐसे सवाल गूंजने लगते हैं। सोचता हूँ क्या यही मानवता है? क्या महाकुम्भ हादसे पर झूठ बोलने वाले अपनों के खोने पर भी ऐसे ही झूठ बोलेंगें? खैर अब पत्रकारिता पर सवाल करना मुर्खता हो चुकी है, कुछ तथाकथित पत्रकारों की पोल तो उनकी शर्मनाक हरकतों ने खोल दी है, जो लाखों के विज्ञापन के लिए लोगों की मौत को अनदेखा कर सकते हैं। क्या अब उनका ज़मीर भी मर गया है? मेरा मकसद किसी की आलोचना करना नहीं है, हम तो सभी का सम्मान करते हैं और सवाल भी करते हैं, खैर किससे सवाल करें? सवालों का जबाब तो न्यायिक आयोग की टीम के सामने अधिकारी भी नहीं दे पा रहे हैं।




दावा है कि प्रयागराज इन दिनों दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बना हुआ है। बताया जा रहा है कि मौनी अमावस्या पर लगभग आठ करोड़ लोगों ने गंगा के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई। मौनी अमावस्या से पहले ही भारी संख्या में लोग यहां पहुंचने लगे थे। बताया जा रहा है कि अमावस्या के चलते हर कोई संगम नोज पर स्नान करना चाह रहा था इसलिए मंगलवार शाम से ही भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। कई श्रद्धालु तो ऐसे थे जो मध्य रात्रि में ही संगम क्षेत्र में पहुंच गए थे और वहां आराम करने लगे थे। इस बीच रात करीब दो बजे खबर आई कि संगम नोज के पास भगदड़ मच गई। लेकिन भगदड़ केवल एक जगह नहीं बल्कि दो जगह हुई। ऐसा हम नहीं मीडिया रिपोर्ट कह रही है, दूसरी भगदड़ झुषी के पास हुई और वहां की तस्वीर भी भयावह है।
सरकारी आंकड़ों में 30 लोगों की मौत हुई लेकिन क्या ये नम्बर वाकई में इतना ही है? यही तो बड़ा सवाल है। भगदड़ में ग्राउंड से वास्तविक रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के आंकड़ों और सरकारी आंकड़ों में अंतर है लेकिन क्यों? सही आंकड़े और सही जानकारी सामने क्यों नहीं आ रहे हैं, अब क्या लाशों से भी उनका अधिकार छीन लिया जायेगा? खैर सही जानकरी तो न्यायिक आयोग के पास भी नहीं पहुंची और कहा तो ये भी जा रहा है कि सही जानकारी मुख्यमंत्री के पास भी नहीं पहुँच रही है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक आयोग का गठन कर दिया था और अब भगदड़ की जांच करने शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे न्यायिक आयोग की टीम प्रयागराज पहुंची। ये हम नहीं कह रहे हैं, मीडिया रिपोर्ट कह रही है।


आयोग में रिटायर्ड जज हर्ष कुमार के अलावा पूर्व डीजी वीके गुप्ता और रिटायर्ड आईएएस डीके सिंह शामिल हैं। ख़बर के अनुसार सर्किट हाउस में न्यायिक आयोग के तीनों सदस्यों ने बैठक की। इसमें कमिश्नर प्रयागराज जोन विजय विश्वास पंत, मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, एडीजी प्रयागराज जोन भानु भास्कर, डीआईजी वैभव कृष्ण के साथ ही पुलिस के अन्य अफसर शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि मेला से जुड़े अधिकारी आयोग के सवालों का सही से जवाब तक नहीं दे पाए। सभी अधिकारी अपने कामों की वाहवाही करने में ही जुटे थे। इस पर आयोग ने कहा कि अगर सब ठीक था तो भगदड़ कैसे हुई?
आखिर कैसे हुई भगदड़? यही सवाल तो श्रद्धालु भी पूछ रहे हैं। हजारों करोड़ों खर्च करके महाकुम्भ व्यवस्थाओं को बनाया गया, उसका गुणगान किया गया, फिर कहाँ चूक हुई? सोशल मीडिया पर श्रद्धालु, VIP कल्चर को बढ़ावा देने का आरोप क्यों लगा रहे हैं? क्यों आरोप लग रहा है कि कई रास्तों को बंद कर दिया गया था? आयोग के सवाल भी कुछ ऐसे ही थे।
ख़बर के अनुसार आयोग ने ये 4 सवाल दागे :
1- जब आपको पता था कि इतनी ज्यादा संख्या में भीड़ आने वाली है तो सुरक्षा के इंतजाम क्या किए थे?
2- यह घटना संगम क्षेत्र के अलावा और कहां-कहां हुई?
3- मीडिया में जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनकी क्या हकीकत है? क्या झुंसी में भी कोई घटना हुई है?
4- सभी घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज दिखाइए। भीड़ कंट्रोल के लिए बनाई प्लानिंग का विवरण दीजिए।
घटनास्थल की जमीनी सच्चाई पर फोकस
आयोग ने अधिकारियों से हादसे की परिस्थितियों और इलाके की भौगोलिक स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली। न्यायमूर्ति हर्ष कुमार ने बताया कि यह आकस्मिक दुर्घटना थी लेकिन इसके पीछे के कारणों को सिलसिलेवार तरीके से समझने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर निरीक्षण पूरा कर लिया गया है, लेकिन अगर दोबारा जांच की जरूरत पड़ी तो टीम फिर आएगी। आयोग के सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस डीके सिंह और सेवानिवृत्त आईपीएस वीके गुप्ता ने भी जांच में तेजी लाने की बात कही है। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि हमारे पास केवल एक महीने का समय है, लेकिन जांच को प्राथमिकता के साथ तेजी से पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया से महाकुम्भ में कोई व्यवधान न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। आयोग सभी तथ्यों का गहन विश्लेषण कर किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचेगा।
घायलों से जानकारी जुटाई जाएगी
आयोग ने अस्पताल जाकर घायलों से भी बातचीत करने की योजना बनाई है। न्यायमूर्ति हर्ष कुमार ने कहा कि घायलों से मिली जानकारी जांच को सही दिशा देने में मदद करेगी। किसी एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सभी संभावित कारणों पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले, आयोग के तीनों सदस्यों ने गुरुवार को लखनऊ के जनपथ स्थित अपने कार्यालय में पहुंचकर कामकाज की शुरुआत की थी। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हर्ष कुमार ने बताया था कि जांच को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना है इसलिए हमने घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर कार्यभार संभाल लिया है।”

31 करोड़ से ज्यादा संगम में डुबकी लगा चुके
दावा किया जा रहा है कि महाकुंभ के 19वें दिन शुक्रवार को अब तक 1.40 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। 13 जनवरी से अब तक यह आंकड़ा 31 करोड़ को पार कर गया है।


