प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती रही है। इसी चुनौती को देखते हुए इस बार पहली बार हाईटेक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत शहर और मेला क्षेत्र में यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को जाम की परेशानी न झेलनी पड़े और सुरक्षा के साथ समयबद्ध आवागमन सुनिश्चित हो सके।
छह प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स पर चौबीसों घंटे निगरानी:
माघ मेले को ध्यान में रखते हुए जिले के छह प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स को चिन्हित किया गया है। इन सभी स्थानों पर चौबीस घंटे और सप्ताह के सातों दिन लाइव निगरानी की जा रही है। इन एंट्री प्वाइंट्स से शहर और मेला क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।
आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग:
इस पूरे प्लान की निगरानी के लिए एक आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम पूरे शहर और मेला क्षेत्र के ट्रैफिक मूवमेंट पर रियल टाइम नजर रख रहा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से हर मार्ग की स्थिति तत्काल सामने आ जाती है, जिससे निर्णय लेने में देरी नहीं होती।
तीन शिफ्ट में 21 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी:
हाईटेक ट्रैफिक कंट्रोल रूम में कुल 21 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ये पुलिसकर्मी तीन शिफ्टों में काम कर रहे हैं, ताकि चौबीस घंटे निगरानी बनी रहे। प्रत्येक शिफ्ट में अधिकारी अलग-अलग रूट्स पर नजर रखते हैं और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है।
Google Maps से ट्रैफिक की डिजिटल निगरानी:
इस ट्रैफिक प्लान की एक खास बात यह है कि निगरानी पूरी तरह डिजिटल है। इसके लिए Google Maps की मदद ली जा रही है, जिससे यह तुरंत पता चल जाता है कि किस मार्ग पर ट्रैफिक सामान्य है और कहां दबाव बढ़ रहा है। जैसे ही किसी रूट पर रेड या येलो लाइन दिखाई देती है, कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
पहली बार लागू हुआ 3-5-7 मिनट रिस्पॉन्स प्लान:
हाईटेक ट्रैफिक मैनेजमेंट की सबसे बड़ी खासियत ‘3-5-7 मिनट रिस्पॉन्स प्लान’ है। इसके तहत यदि किसी स्थान पर तीन मिनट तक कंजेशन बना रहता है तो संबंधित चौकी इंचार्ज को सूचना दी जाती है। पांच मिनट तक जाम रहने की स्थिति में थाना प्रभारी को मौके पर पहुंचना होता है। वहीं यदि सात मिनट तक ट्रैफिक बाधित रहता है तो संबंधित एसीपी की जिम्मेदारी तय कर दी जाती है। इस व्यवस्था से जाम को लंबे समय तक बने रहने से रोका जा रहा है।
बारह संवेदनशील ट्रैफिक पैच किए गए चिन्हित:
माघ मेले के मद्देनजर ट्रैफिक के लिहाज से 12 संवेदनशील पैच चिन्हित किए गए हैं। ये वे इलाके हैं जहां पहले अक्सर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता था। इनमें चौफटका से नेहरू पार्क, अंदावा से टीकरमाफी, लेप्रोसी चौराहा और जीटी जवाहर से बांगड़ मार्ग जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन सभी पैचों पर लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।
16 क्विक रिएक्शन टीम की तैनाती:
ट्रैफिक जाम या किसी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए 16 क्विक रिएक्शन टीम बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में छह पुलिसकर्मी शामिल हैं और टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी कर रहा है। इन टीमों की तैनाती पहले से तय किए गए पैचों पर की गई है, ताकि जरूरत पड़ते ही उन्हें मौके पर भेजा जा सके।
एनसीआर बिल्डिंग में स्थापित किया गया कंट्रोल रूम:
ट्रैफिक कंट्रोल रूम एनसीआर बिल्डिंग में बनाया गया है। इसकी जिम्मेदारी एडीसीपी ट्रैफिक IPS Pushkar Verma के पास है। यहां 12-12 घंटे की शिफ्ट में दो एसीपी भी तैनात किए गए हैं, जिससे निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो।
तीन लाख से अधिक वाहनों की संभावना को देखते हुए तैयारी:
एडीसीपी ट्रैफिक IPS Pushkar Verma के अनुसार, प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान तीन लाख से अधिक वाहनों के प्रयागराज आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए ADG Law and Order और Police Commissioner Joginder Kumar के निर्देश पर यह व्यापक ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है। माघ मेले के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर और सेंट्रली मॉनिटर किया जाने वाला ट्रैफिक सिस्टम लागू किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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