लखनऊ में सपा और NSUI का जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ (Lucknow) के हजरतगंज (Hazratganj) इलाके में छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई, जब NSUI (एनएसयूआई) और समाजवादी छात्र सभा (Samajwadi Chhatra Sabha) से जुड़े छात्र-छात्राओं ने हजरतगंज चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का कारण संभल मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान CJI (Chief Justice of India) के ट्रांसफर को लेकर उपजी नाराजगी बताई गई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपने हाथों में संविधान की प्रति लेकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता के समर्थन में नारेबाजी की और कहा कि किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव स्वीकार्य नहीं है।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हिरासत में लिया गया और उन्हें इको गार्डन (Eco Garden) भेज दिया गया। इस दौरान पूरे इलाके में कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही, हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने का दावा किया।

संविधान के साथ न्याय की मांग:
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संविधान देश की सर्वोच्च मार्गदर्शक शक्ति है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का दबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक हो सकता है। छात्रों ने आरोप लगाया कि संभल मामले में CJI के ट्रांसफर को लेकर जो परिस्थितियां बनी हैं, वे न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती हैं। इसी के विरोध में उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता चुना और संविधान को प्रतीक के रूप में सामने रखा।

पुलिस की कार्रवाई और हिरासत:
हजरतगंज क्षेत्र में बढ़ती भीड़ और नारेबाजी को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रदर्शन जारी रहने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कदम पूरी तरह से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

छात्र संगठनों का बयान:
समाजवादी छात्र सभा और NSUI से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता फैलाना नहीं था। उनका कहना था कि यह विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे न्यायपालिका के सम्मान में खड़े हैं और किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध करते रहेंगे। उनका यह भी कहना था कि अगर ऐसे मामलों पर आवाज नहीं उठाई गई तो आने वाले समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

मणिकर्णिका घाट पर दूसरा विरोध:
इसी क्रम में समाजवादी छात्र सभा ने एक अन्य मुद्दे को लेकर भी विरोध दर्ज कराया। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर प्रदर्शन किया। यह विरोध अहिल्याबाई होल्कर (Ahilyabai Holkar) की प्रतिमाओं को खंडित किए जाने के मामले में था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस प्रकार की घटनाएं सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाती हैं।

सरकार और प्रशासन से मांग:
मणिकर्णिका घाट पर हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि प्रतिमाओं को खंडित करने वालों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की रक्षा करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। इस मुद्दे पर भी छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी।

सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर जोर:
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर जैसी ऐतिहासिक शख्सियतें समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनकी प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर सांस्कृतिक विरासत पर हमला है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा:
लखनऊ में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ी है, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छात्र संगठनों की सक्रियता ने इन मुद्दों को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

आगे की रणनीति:
छात्र संगठनों का कहना है कि वे आगे भी संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। उनका दावा है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर कदम कानून के दायरे में रहकर ही उठाया जाएगा।


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