Lucknow: राजधानी लखनऊ का बेहटा इलाका अवैध पटाखा फैक्ट्रियों का गढ़ बन चुका था, जहाँ घर-घर में विस्फोटक सामग्री का अवैध भंडारण किया जा रहा था। रविवार को हुए दो विस्फोटों के बाद, पुलिस और बम स्क्वायड की संयुक्त टीम ने गाँव में छापेमारी कर लगभग 30 क्विंटल से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की है।
रविवार को हुए दो धमाकों ने पूरे इलाके को हिला दिया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मुख्य विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज 2 किलोमीटर दूर तक सुनी गई। इस घटना के बाद, पुलिस की टीम ने सोमवार और मंगलवार को गाँव के 200 से अधिक घरों और दुकानों की तलाशी ली। इस दौरान 6 घरों और कॉस्मेटिक दुकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ और पटाखे बनाने की सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने 15-15 फीट गहरे दो गड्ढे खोदकर बरामद विस्फोटक को नष्ट कर दिया।
विस्फोटों से गाँव में दहशत का माहौल
पहला धमाका गुडंबा थाना क्षेत्र के बेहटा गाँव में आलम के घर में हुआ। विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी बिल्डिंग जमींदोज हो गई, और उससे सटे मकान भी ढह गए। आलम और उनकी पत्नी मुन्नी की जलने और मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि 5 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में शाम को एक और गोदाम में हुए धमाके में एक महिला घायल हुई। इन घटनाओं के बाद से गाँव में दहशत का माहौल है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस बड़े हादसे ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का अवैध भंडारण और फैक्ट्रियों का संचालन पुलिस की नाक के नीचे होता रहा, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पटाखे बनाने और आवाज जाँचने के लिए नियमित रूप से विस्फोट होते रहते थे, लेकिन पुलिस ने कभी ध्यान नहीं दिया। इस मामले में बेहटा चौकी इंचार्ज और एक सिपाही को निलंबित किया गया है, लेकिन लोगों का मानना है कि इसमें बड़े अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कई पटाखा कारोबारी फरार
छापेमारी की खबर फैलते ही कई अवैध पटाखा कारोबारी अपना माल छिपाने में जुट गए और गाँव छोड़कर फरार हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात भर महिलाएं और पुरुष बोरियों में भरकर पटाखे छिपाते दिखे और कुछ पटाखे गाँव के पास बने तालाब में भी मिले हैं। एसीपी अनिरुद्ध विक्रम सिंह ने बताया कि बम स्क्वायड टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है और बरामद सामग्री की पूरी जानकारी इकट्ठा करने के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने मामले की जांच एडिशनल डीसीपी और एसीपी को सौंपी है ताकि पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा सके।
राजधानी लखनऊ में बारूद का ढेर, घर-घर मिलीं अवैध पटाखा फैक्ट्रियां