Lucknow: उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस दाखिले को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों का भंडाफोड़ हुआ है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की जांच में नौ जिलों से जारी 64 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसके आधार पर 24 अभ्यर्थियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है।
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह ने बताया कि यूपी नीट-यूजी 2025 की पहली काउंसिलिंग में राज्य कोटे की 4442 सीटों में से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित उपश्रेणी को दो प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण यानी 88 सीटें मिली थीं। इनमें से 79 सीटों का आवंटन हुआ और 71 अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया। इसी दौरान फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाली एक छात्रा का प्रमाणपत्र संदिग्ध पाया गया। जांच में आगरा डीएम कार्यालय ने उसे फर्जी घोषित कर दिया।
इसके बाद व्यापक जांच शुरू की गई। आगरा, गाजीपुर, बलिया, भदोही, मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद और बुलंदशहर जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई। रिपोर्ट में 64 प्रमाणपत्र फर्जी साबित हुए। इनमें मेरठ से सबसे ज्यादा 15, बलिया व सहारनपुर से 12-12, भदोही व गाजीपुर से नौ-नौ, वाराणसी से तीन, गाजियाबाद से दो और आगरा व बुलंदशहर से एक-एक फर्जी प्रमाणपत्र पाए गए।
काउंसिलिंग बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि फर्जी प्रमाणपत्र वाले सभी अभ्यर्थियों का प्रवेश तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही, इन्हें आगामी काउंसिलिंग से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश भेजकर प्रवेश रद्द कराने को कहा गया है।
संबंधित जिलाधिकारियों को ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी न केवल आरक्षण नीति की अवमानना है, बल्कि वास्तविक हकदार अभ्यर्थियों का अधिकार भी छीनने का प्रयास है।
एमबीबीएस दाखिले में बड़ा फर्जीवाड़ा!