पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को किडनी की समस्या, KGMU में चल रहा इलाज

रिपोर्ट: सऊद अंसारी



Lucknow: पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, जो लखनऊ जेल में बंदी के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, अब किडनी की समस्या और हाइपर टेंशन जैसी पुरानी बीमारियों से भी परेशान हैं। फिलहाल उनका इलाज KGMU के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। मंगलवार देर रात गंभीर घायल अवस्था में उन्हें ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में भर्ती कराया गया था और बाद में ट्रॉमा सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया।

किडनी और अन्य बीमारियों की चिंता:


डॉक्टरों के अनुसार गुरुवार को पूर्व मंत्री को किडनी से जुड़ी परेशानी हुई। इसके अलावा उन्हें पहले से ही शुगर और हाइपर टेंशन की समस्या है। चोट के बाद इन पुरानी बीमारियों के बढ़ने की संभावना रहती है। इस वजह से उन्हें ट्रॉमा सर्जरी वार्ड से मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस निर्णय का अधिकार केवल एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमेटी के पास है।



एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में इलाज:


KGMU ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. प्रेमराज सिंह ने कहा कि पूर्व मंत्री की हालत में सुधार है, लेकिन वे किडनी, शुगर, हाइपर टेंशन और बीपी जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। इसलिए उनके इलाज में मेडिसिन एक्सपर्ट की भी राय ली गई है। जरूरत पड़ने पर उन्हें मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है ताकि उनकी सभी बीमारियों पर विशेष ध्यान रखा जा सके।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग की रिपोर्ट:


ट्रॉमा सर्जरी विभाग की डॉ. अनीता ने बताया कि प्रजापति की कंडिशन स्थिर है। वे दवाओं का प्रभाव महसूस कर रहे हैं और बातचीत भी कर पा रहे हैं। फिलहाल उन्हें कुछ दिन और निगरानी में रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें अन्य वार्ड या विभाग में शिफ्ट किया जा सकता है।

देखरेख और आगे की योजना:


पूर्व मंत्री की देखरेख में एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्हें ट्रॉमा सर्जरी वार्ड में रहने के दौरान उनकी पुरानी बीमारियों के हिसाब से दवाएं दी जा रही हैं। मेडिकल टीम का कहना है कि उनका स्वास्थ्य फिलहाल नियंत्रित और स्थिर है, लेकिन किडनी और हाइपर टेंशन की स्थिति के कारण सतत निगरानी जरूरी है।

परिवार और सुरक्षा की जानकारी:


परिवार और सुरक्षा टीम भी लगातार उनके साथ हैं। मेडिकल टीम समय-समय पर स्वास्थ्य अपडेट दे रही है और किसी भी बदलाव पर तुरंत कार्रवाई कर रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में हो।

निगरानी और संभावित शिफ्ट:


जरूरत पड़ने पर उन्हें ट्रॉमा सर्जरी वार्ड से मेडिसिन वार्ड या किसी अन्य विशेषज्ञ विभाग में शिफ्ट किया जा सकता है। एक्सपर्ट डॉक्टरों की समिति यह तय करेगी कि शिफ्टिंग कब और कैसे की जाए। फिलहाल, उनका इलाज पूरी तरह नियंत्रण में और एक्सपर्ट निगरानी में जारी है।

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