“प्रदर्शनी योजना घोटाले में “अपर्णा यादव” की मां पर FIR…

रिपोर्ट: सऊद अंसारी



Lucknow: लखनऊ में प्रदर्शनी योजना के भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। विजिलेंस की खुली जांच में दोषी पाए जाने पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की समधन अंबी बिष्ट समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि भूखंड आवंटन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर गंभीर अनियमितताएं की गईं।

अंबी बिष्ट पर आरोप

अंबी बिष्ट उस समय संपत्ति अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें प्रियदर्शनी जानकीपुरम योजना में भूखंडों के आवंटन में बदलाव कर अनियमितताएं करने का आरोपी बनाया गया है। खास बात यह है कि अंबी बिष्ट स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की सास हैं, जिस कारण यह मामला और भी सुर्खियों में है।

अन्य अधिकारियों पर केस

इस मामले में केवल अंबी बिष्ट ही नहीं बल्कि तत्कालीन अनुभाग अधिकारी वीरेंद्र सिंह और उपसचिव देवेंद्र सिंह राठौड़ के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। इनके अलावा वरिष्ठ कॉस्ट अकाउंटेंट सुरेश विष्णु और वर्ग सहायक शैलेंद्र कुमार गुप्ता का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल है। इन सभी पर भूखंड आवंटन प्रक्रिया को प्रभावित कर भ्रष्टाचार करने का आरोप है।

विजिलेंस जांच की पृष्ठभूमि

विजिलेंस विभाग ने 2016 में इस पूरे प्रकरण की खुली जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान पाया गया कि भूखंडों के आवंटन में नियमों को ताक पर रखकर लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस

सभी आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

मामला क्यों महत्वपूर्ण

लखनऊ विकास प्राधिकरण की प्रदर्शनी योजना और प्रियदर्शनी जानकीपुरम योजना दोनों ही बड़े पैमाने पर चलाए गए प्रोजेक्ट्स हैं। इन योजनाओं में आम नागरिकों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने का उद्देश्य था, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आवंटन प्रक्रिया में गड़बड़ी की।

आगे की कार्रवाई

विजिलेंस की एफआईआर के बाद अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की अगली प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसी आरोपियों से पूछताछ कर सकती है और यदि आवश्यक हुआ तो गिरफ्तारी की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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