रिपोर्ट: सऊद अंसारी
Lucknow: उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल के तहत, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में निजी ऑपरेटरों की भागीदारी से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य शहरी नागरिकों को एक विश्वसनीय, आरामदायक और किफायती परिवहन सुविधा प्रदान करना है, जो ‘नेट कॉन्ट्रैक्ट मोड’ के तहत संचालित होगी। यह कदम राज्य के शहरी परिवहन को नया रूप देगा।
परियोजना का विवरण: रूट, बोली और संचालन
परियोजना के अनुसार, कानपुर और लखनऊ में दस-दस अलग-अलग मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। प्रत्येक मार्ग पर कम से कम 10 बसों का संचालन होगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित की गई हैं, जिसमें ऑपरेटर बसों की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। बोली प्रक्रिया में ऑपरेटर एक या एक से अधिक मार्गों के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि एक ही मार्ग पर दो अलग-अलग ऑपरेटरों को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे संचालन में कोई व्यवधान न आए।
चार्जिंग और डिपो सुविधा
इस योजना के अंतर्गत, बस डिपो के लिए जगह नगर निगम या नगर परिवहन प्राधिकरण द्वारा आवंटित की जाएगी। इसके अलावा, बसों को चार्ज करने के लिए आवश्यक चार्जिंग स्टेशन और मीटरिंग सुविधाएं भी प्राधिकरण ही उपलब्ध कराएगा। इस तरह की व्यवस्था से निजी ऑपरेटरों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार हो जाएगा, जिससे वे सुचारु रूप से अपना काम कर सकेंगे। पूरी बोली प्रक्रिया ई-टेंडरिंग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
प्रदूषणमुक्त परिवहन की ओर एक कदम
उत्तर प्रदेश शहरी परिवहन निदेशालय की यह पहल न सिर्फ सार्वजनिक आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि राज्य में प्रदूषण को कम करने में भी मदद करेगी। इलेक्ट्रिक बसें शून्य-उत्सर्जन वाहन हैं, जो शहरों की हवा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 30 सितंबर, 2025 तक बोली जमा करने की अंतिम तिथि के बाद, इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है, जिससे जल्द ही लखनऊ और कानपुर के नागरिकों को इस आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का लाभ मिल सकेगा। यह कदम उत्तर प्रदेश को एक हरित और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की ओर अग्रसर करेगा।