लखनऊ: मेयर को माता कहकर फूट-फूटकर रोया भाजपा पार्षद, OSD पर वार्ड चलाने का लगाया आरोप

लखनऊ (Lucknow) नगर निगम का सामान्य सदन उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) के पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट को लेकर तीखा विरोध शुरू कर दिया। सामान्य सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाए और नारेबाजी करते हुए अपना असंतोष दर्ज कराया। वहीं भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के पार्षद एकजुट होकर मेयर के समर्थन में खड़े नजर आए। सदन की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा और कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।

मेयर सुषमा खर्कवाल (Sushma Kharkwal) ने हंगामे के बीच स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने सामान्य सदन और पुनरीक्षित बजट, दोनों से जुड़े प्रस्ताव नियमानुसार भेजे थे। उनका कहना था कि चार महीने से सामान्य सदन की बैठक नहीं हो पाई थी, इसलिए पहले सामान्य सदन आयोजित किया गया। इसके बावजूद विपक्षी पार्षदों ने जवाब को संतोषजनक नहीं माना और विरोध जारी रखा।

पुनरीक्षित बजट पर उठे सवाल:
सदन में अपर नगर आयुक्त ललित कुमार (Lalit Kumar) ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि पुनरीक्षित बजट को पहले से स्वीकृति दिलाना अनिवार्य होता है। इसी प्रक्रिया के तहत पहले सामान्य बजट पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण के बाद भी सपा और कांग्रेस पार्षद शांत नहीं हुए और लगातार सवाल उठाते रहे।

विपक्ष का विरोध और नारेबाजी:
मेयर और अपर नगर आयुक्त के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी पार्षदों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। उनका कहना था कि पुनरीक्षित बजट को लेकर नगर निगम प्रशासन पारदर्शिता नहीं बरत रहा है। नारेबाजी के बीच कार्यवाही को आगे बढ़ाने में अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

डूडा फर्जीवाड़े का मुद्दा उठा:
हंगामे के बीच अचानक डूडा (DUDA) से जुड़ा मामला सदन में उठाया गया। भाजपा पार्षद अरुण राय (Arun Rai) ने आरोप लगाया कि डूडा की कॉलोनी में अफसरों ने कथित तौर पर डेढ़ लाख रुपये लेकर मनीष नामक व्यक्ति का आवंटित घर एक मुस्लिम परिवार को दे दिया। इस आरोप के बाद सदन में फिर से शोर बढ़ गया और विपक्ष ने मामले की जांच की मांग की।

सीवर और पेयजल समस्या पर एकजुटता:
इसके बाद सदन में सीवर और पेयजल से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा गूंज उठा। इस विषय पर सपा, कांग्रेस और भाजपा के पार्षद एकजुट नजर आए। सभी दलों ने कार्यदायी कंपनी स्वेज इंडिया (Suez India) को कठघरे में खड़ा करते हुए उस पर लापरवाही के आरोप लगाए। पार्षदों का कहना था कि कंपनी की वजह से कई वार्डों में जनता को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मेयर और पार्षद के बीच तकरार:
सीवर और पेयजल के मुद्दे पर चर्चा के दौरान भाजपा पार्षद अमित चौधरी (Amit Chaudhary) और मेयर सुषमा खर्कवाल के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। भावुक होते हुए अमित चौधरी रोने लगे और कहा कि उनका वार्ड मेयर के कार्यालय विशेषाधिकारी (OSD) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस बयान के बाद सदन में हंगामा और तेज हो गया।

सदन स्थगित, फिर शुरू हुई कार्यवाही:
लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते सामान्य सदन की कार्यवाही लगभग 30 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद जब बैठक दोबारा शुरू हुई, तब भी माहौल पूरी तरह शांत नहीं हो सका। पार्षदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा और नगर निगम प्रशासन के सामने व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी रही।

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