लखनऊ में बड़ा प्रशासनिक कदम: तड़के 4 बजे मस्जिद ध्वस्त, हाईकोर्ट आदेश के बाद कार्रवाई

लखनऊ (Lucknow, Uttar Pradesh, India) में गुरुवार तड़के करीब 4 बजे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मस्जिद को बुलडोजर से गिरा दिया। बख्शी का तालाब क्षेत्र के अस्ती गांव में स्थित इस मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासनिक टीम एडीएम और एसडीएम के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई में तीन बुलडोजर लगाए गए और पूरी संरचना को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा के लिए पीएसी की दो टुकड़ियों समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई:
यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद की गई। प्रशासन के अनुसार मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। कोर्ट ने छह दिन पहले, 26 मार्च को, इस संरचना को हटाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई की।

मामले की शुरुआत और कानूनी प्रक्रिया:
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी, जब प्रशासन ने तहसीलदार कोर्ट में याचिका दाखिल की। 19 अक्टूबर 2024 को लेखपाल ने कब्जे की जानकारी दी, जिसके बाद 21 अक्टूबर को नोटिस जारी हुआ। 28 फरवरी 2025 को तहसीलदार कोर्ट ने मस्जिद हटाने और 36 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए संबंधित पक्ष एडीएम कोर्ट गया, जहां से भी याचिका खारिज कर दी गई।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला:
एडीएम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 25 मार्च 2026 को लखनऊ बेंच ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और तहसील स्तर के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि कोर्ट ने 36 हजार रुपए के जुर्माने को निरस्त कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने 31 मार्च को अंतिम नोटिस जारी कर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए।

प्रशासन का पक्ष:
एडीएम प्रशासन राकेश सिंह के अनुसार, कार्रवाई से पहले अवैध कब्जाधारियों को चेतावनी दी गई थी। रात में विरोध की सूचना मिलने पर प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और तड़के कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय पक्ष का दावा:
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मस्जिद करीब 60 साल पहले बनाई गई थी और यह कोई नया अतिक्रमण नहीं है। उनका दावा है कि वे वहां केवल नमाज अदा करने के लिए जाते थे और मस्जिद के निर्माण या प्रबंधन में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।

कानूनी प्रावधान और कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूपी राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत ग्राम पंचायत या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया संक्षिप्त होती है और इसमें शपथ पत्रों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। हर मामले में गवाहों की जिरह अनिवार्य नहीं होती। इसी प्रावधान के तहत प्रशासन ने कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य:
करीब एक घंटे की कार्रवाई के बाद मलबा हटाकर क्षेत्र को खाली करा लिया गया। मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित रखा। फिलहाल इलाके में शांति बनाए रखने के लिए निगरानी जारी है।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com


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