लखनऊ (Lucknow) की बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवा में 1 नवंबर से ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। लखनऊ विद्युत संपूर्ति प्रशासन (LESA) अब तक जिस पारंपरिक व्यवस्था पर काम करता रहा, वह जल्द ही बदल जाएगी। 1 नवंबर से वर्टिकल सिस्टम (Vertical System) पूरी तरह लागू हो जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगा।
वर्टिकल सिस्टम क्या है और क्यों खास है:
वर्टिकल सिस्टम का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है। इसमें अब कार्य और शिकायतों के लिए ‘सिंगल पॉइंट ऑफ कांटेक्ट’ होगा। इसका मतलब है कि अब कार्य क्षैतिज (Horizontal) न होकर ऊर्ध्वाधर (Vertical) ढांचे में बंटेंगे। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (Madhyanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited) की जनसंपर्क अधिकारी शालिनी यादव (Shalini Yadav) के अनुसार, बिजली बिल संशोधन, मीटर खराब होने या आपूर्ति बाधित होने जैसी शिकायतों का समाधान अब एक ही हेल्प डेस्क से किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को अलग-अलग अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
उपभोक्ताओं के लिए विशेष इंतजाम:
वर्टिकल सिस्टम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए लेसा (LESA) के चारों ज़ोन—अमौसी, लखनऊ मध्य, जानकीपुरम और गोमती नगर—में कुल 21 हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। इसका वितरण इस प्रकार है:
- अमौसी ज़ोन: 7 हेल्प डेस्क
- लखनऊ मध्य ज़ोन: 6 हेल्प डेस्क
- जानकीपुरम ज़ोन: 4 हेल्प डेस्क
- गोमती नगर ज़ोन: 4 हेल्प डेस्क
सभी शिकायतों के लिए मुख्य विकल्प टोल-फ्री नंबर 1912 रहेगा। जिन उपभोक्ताओं को इस नंबर से शिकायत दर्ज करने में परेशानी हो, उनके लिए यह ज़ोनवार हेल्प डेस्क वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में काम करेंगी। ये डेस्क शुक्रवार से ट्रायल पर चालू कर दी जाएंगी, ताकि 1 नवंबर से पूर्ण रूप से संचालन शुरू होने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं की जांच हो सके।
प्रशासन की सख्ती और विरोध:
इस बदलाव का कुछ बिजली संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन जिलों में यह सिस्टम लागू है, वहां यह विफल रहा है और लखनऊ की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल (Riya Kejriwal) ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति और शिकायतों का समय पर निस्तारण करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था:
एमडी ने अधिकारियों के काम स्पष्ट रूप से विभाजित किए हैं ताकि कोई भी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच न सके। इस नई वर्टिकल व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती के दम पर लेसा (LESA) 1 नवंबर से उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं के लिए तैयार है।
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