लखनऊ (Lucknow) के अलीगंज (Aliganj) क्षेत्र स्थित एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासनिक और जांच एजेंसियां लगातार मामले की पड़ताल में जुटी हुई हैं। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हादसे की जांच के लिए गठित एसआईटी और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बिल्डिंग का निरीक्षण किया और प्रवेश मार्ग समेत विभिन्न बिंदुओं की जांच की। एसआईटी में आईपीएस प्रवीण कुमार (IPS Praveen Kumar) और आईएएस अमृत अभिजात (IAS Amrit Abhijat) शामिल हैं।
जांच के लिए घटनास्थल पर पहुंची एसआईटी टीम:
हादसे के अगले दिन जांच प्रक्रिया को तेज करते हुए एसआईटी और फोरेंसिक टीम ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बिल्डिंग के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच की और आग लगने की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। टीम ने विशेष रूप से एंट्री प्वाइंट और भवन की संरचना का अवलोकन किया ताकि हादसे से जुड़े तथ्यों को एकत्र किया जा सके।
पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपे गए शव:
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शवों का करीब सात घंटे तक पोस्टमॉर्टम किया गया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए। पोस्टमॉर्टम हाउस में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब पश्चिम बंगाल (West Bengal) की 23 वर्षीय अनामिका का शव देखकर उसकी मां बेहोश हो गई। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
बिल्डिंग को लेकर सामने आई अहम जानकारी:
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि जिस भवन में आग लगी थी, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में था। बताया गया कि वर्ष 2016 में इस भवन को गिराने का आदेश दिया गया था, हालांकि बाद में यह आदेश निरस्त कर दिया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (Lucknow Development Authority-LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार (Prathamesh Kumar) ने बताया कि भवन मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। निर्धारित अवधि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भवन मालिक समेत चार आरोपी गिरफ्तार:
यह बिल्डिंग रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (Rameshwaram Institute of Technology and Management) के मालिक वीरेंद्र शुक्ला (Virendra Shukla) की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले में गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करते हुए वीरेंद्र शुक्ला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। भवन को अनुमति देने से जुड़े 16 अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
फायर सेफ्टी व्यवस्था का अभाव आया सामने:
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि भवन में फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई अलग मार्ग उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा हादसे के समय छत की ओर जाने वाला दरवाजा भी बंद था। ऐसे में अंदर मौजूद लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
एसी ब्लास्ट के बाद लगी थी आग:
जानकारी के अनुसार यह हादसा सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ। अलीगंज (Aliganj) क्षेत्र स्थित भवन में एसी में ब्लास्ट होने के बाद आग लग गई। आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 40 मिनट बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।
घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन:
हादसे के बाद एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने लगभग सात घंटे तक राहत और बचाव अभियान चलाया। कई स्थानों पर दीवारें तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। लंबे अभियान के बाद शवों को बाहर निकाला गया और पूरे परिसर की तलाशी ली गई।
युवा छात्रों की गई जान:
हादसे में जान गंवाने वाले 15 लोगों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। मृतकों में अधिकांश 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के छात्र बताए गए हैं। मृतकों में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के 11 लोग शामिल हैं, जिनमें लखनऊ (Lucknow) के 8, कानपुर (Kanpur) के 2 और बाराबंकी (Barabanki) का 1 व्यक्ति शामिल है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल (West Bengal) की दो युवतियों तथा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और हरियाणा (Haryana) के एक-एक व्यक्ति की भी इस हादसे में मृत्यु हुई है।
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