Ghazipur: ट्रेन दुर्घटना हुई मृत्यु लेकिन फिर जो हुआ…

Report: Haseen Ansari

Ghazipur । ईश्वर ने धरती पर प्रत्येक मनुष्य को अकेला नहीं छोड़ा है ईश्वर ही हैं जो लावारिस का भी वारिस है। कहते हैं ना कि कण कण में हरी हैं और यदि कोई व्यक्ति अनाथ ईश्वर किसी ने किसी रूप में उसका साथ देने आ ही जाते हैं भले ही मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार की ही बात क्यों ना हो। ऐसी कई पुण्य आत्माएं आज भी हमारे समाज में जो निस्वार्थ भावना से लोगों की मदद करते हैं। जनता गाजीपुर के कुंवर वीरेंद्र सिंह किसी पहचान की मोहताज नहीं है, निस्वार्थ भावना से उनकी सेवा के लिए सरकार ने भी उन्हें सराहा है और एक बार फिर वह एक लावारिस के वारिस बन ही गयें।

मामला चौकी जीआरपी दिलदारनगर का है। थाना अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति की ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो गईं थी। काफी प्रयास के बाद भी व्यक्ति की शिनाख्त नहीं हो पा रही थी। शिनाख्त ना होने पर मृतक अज्ञात व्यक्ति की लाश को हेड कांस्टेबल अखिलेश कुमार एवं कांस्टेबल राज कुमार पाल के सहयोग से समाजसेवी कुमार वीरेंद्र सिंह ने मर्चरी रूम में रखवाकर शिनाख्त करने की कोशिश करने लगे लेकिन काफी प्रयास के बाद भी शिनाख्त नहीं होने पर 72 घण्टे होने के उपरांत मृतक अज्ञात व्यक्ति की लाश को समाजसेवी कुँवर वीरेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल अखिलेश कुमार एवं कांस्टेबल राज कुमार पाल के सहयोग से मर्चरी रूम से पोस्टमॉर्टम हाऊस ले जाकर पोस्टमॉर्टम कराने के बाद अति प्राचीन श्मशानघाट पर शुद्ध लकड़ी से जलाकर अन्तिम दाहसंस्कार किया गया है। इस कार्य में कृष्ण कुमार बॉसफोर, गोपाल कसौधन, और खुर्शीद ने भी सहयोग किया और सभी ने भगवान से दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करने की प्रार्थना किया।

कुंवर वीरेंद्र सिंह और उनके सहयोगियों ने ऐसे कई लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया है और उनके वारिस बने हैं और उनके इस कार्य में कई पुलिसकर्मियों ने भी साथ दिया है। आज पूरा समाज उनके कार्यों की सरहाना करता है।

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