किन्नर समुदाय को नेग मांगने का कानूनी हक नहीं, ऐसा करना अपराधिक कृत्य, हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) की Lucknow Bench (लखनऊ खंडपीठ) ने किन्नर समुदाय द्वारा नेग के नाम पर की जा रही वसूली को अवैध घोषित करते हुए स्पष्ट निर्णय दिया है कि इस प्रकार की वसूली को किसी भी परिस्थिति में कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि बिना किसी विधिक आधार के धन एकत्र करना Indian Justice Code (भारतीय न्याय संहिता) के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यह निर्णय सामाजिक परंपराओं और कानून के दायरे को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है।

याचिका और दलीलों का विवरण:
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर (Justice Alok Mathur) और जस्टिस अमिताभ कुमार राय (Justice Amitabh Kumar Rai) की खंडपीठ ने किन्नर रेखा देवी (Rekha Devi) की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में Gonda (गोंडा) जिले के कुछ क्षेत्रों को नेग वसूली के लिए आरक्षित करने की मांग की गई थी। याची ने दलील दी कि वह लंबे समय से अपने निर्धारित क्षेत्र में नेग मांगती आ रही है, लेकिन अन्य किन्नरों के आने से विवाद की स्थिति बन रही है। इस मामले में ‘जजमानी परंपरा’ को आधार बनाते हुए इसे पारंपरिक अधिकार बताया गया और अदालत से संरक्षण की मांग की गई।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:
खंडपीठ ने सभी दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी परंपरा के आधार पर अवैध वसूली को वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकार की मांग को स्वीकार किया गया तो यह कानून के विपरीत गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसा होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि वर्तमान कानून व्यवस्था में नेग वसूली को लेकर कोई प्रावधान मौजूद नहीं है, इसलिए इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

कानूनी दृष्टिकोण और प्रभाव:
अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि परंपरा के नाम पर किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली कानून के दायरे से बाहर मानी जाएगी। High Court (हाईकोर्ट) के इस आदेश ने यह संदेश दिया है कि सामाजिक परंपराएं तभी मान्य होंगी जब वे कानून के अनुरूप हों। यह निर्णय भविष्य में इस तरह के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार बन सकता है।

यह पूरा मामला न केवल परंपरा और कानून के बीच संतुलन को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि न्याय व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अवैध आर्थिक गतिविधि को स्थान नहीं दिया जा सकता। अदालत का यह फैसला कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


#Tags: #AllahabadHighCourt, #LucknowBench, #Gonda, #LawOrder, #Judgement

Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading