लखनऊ (Lucknow) स्थित केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर (KGMU Trauma Center) में बांड के तहत नियुक्त नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। अचानक कई डॉक्टरों के हटने से मरीजों के इलाज की व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मामले की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेज दी है और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बांड पर नियुक्त डॉक्टरों ने छोड़ी सेवा:
जानकारी के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में बांड के आधार पर नियुक्त नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट (JR) डॉक्टरों में से अधिकांश ने सेवा देने से इनकार कर दिया है। कुछ डॉक्टरों का चयन पोस्ट ग्रेजुएशन में हो जाने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी, जबकि कई डॉक्टर काम के अत्यधिक दबाव के चलते सेवा जारी रखने के लिए तैयार नहीं हुए। इन सभी डॉक्टरों की नियुक्ति बांड के तहत की गई थी, इसलिए अब उनसे बांड की निर्धारित राशि वसूलने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मरीजों की बढ़ती संख्या से बढ़ा दबाव:
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में कुल लगभग 400 बेड की सुविधा उपलब्ध है। यहां प्रतिदिन 200 से 250 मरीज कैजुअल्टी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें से 80 से 90 मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। ऐसे में डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों की देखभाल और इलाज की गति पर पड़ रहा है। पहले जहां पर्याप्त संख्या में डॉक्टर मौजूद थे, वहीं अब कमी के चलते व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
मार्च में हुई थी भर्ती, फिर शुरू हुआ पलायन:
मार्च महीने में बांड के तहत कुल 11 नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का चयन किया गया था। इन डॉक्टरों का वेतन लगभग एक लाख रुपये से अधिक निर्धारित था और इन्हें ट्रॉमा सेंटर में अपनी सेवाएं देनी थीं। शुरुआती दिनों में कुछ डॉक्टरों ने कार्यभार संभाला भी, लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश ने सेवा छोड़ दी। वर्तमान में 9 डॉक्टर काम करने के लिए उपलब्ध नहीं हैं, जबकि 2 डॉक्टर अवकाश पर बताए जा रहे हैं।
इलाज व्यवस्था पर पड़ रहा असर:
डॉक्टरों की संख्या में आई इस कमी के कारण ट्रॉमा कैजुअल्टी में आने वाले मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। अस्पताल प्रशासन इस स्थिति को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि मरीजों को किसी प्रकार की गंभीर असुविधा न हो।
नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू:
मरीजों को हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज (Dr. Premraj) के अनुसार, जिन डॉक्टरों ने सेवा नहीं दी है, उनकी रिपोर्ट डीजीएमई (DGME) को भेजी जा रही है। साथ ही नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके।
सीनियर फैकल्टी में भी असंतोष:
केवल जूनियर डॉक्टर ही नहीं, बल्कि पिछले एक वर्ष में केजीएमयू से कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी इस्तीफा दिया है। बताया जा रहा है कि करीब 10 से अधिक डॉक्टर संस्थान छोड़ चुके हैं। कुछ समय पहले एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. तन्वी भार्गव (Dr. Tanvi Bhargava) ने भी इस्तीफा दिया था। इस मुद्दे को लेकर फैकल्टी फोरम की बैठक में भी चिंता जताई गई थी।
वित्तीय लाभ न मिलने से बढ़ी नाराजगी:
शिक्षक संघ की बैठक में सचिव डॉ. संतोष कुमार (Dr. Santosh Kumar) ने बताया था कि शासनादेश के अनुसार केजीएमयू के शिक्षकों को एसजीपीजीआई (SGPGI) के समान वित्तीय लाभ मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में उन्हें ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसी कारण डॉक्टरों में असंतोष बढ़ रहा है और वे संस्थान छोड़ने का निर्णय ले रहे हैं।
कई विभागों से डॉक्टरों का इस्तीफा:
विभिन्न विभागों से कई डॉक्टरों ने बीते समय में इस्तीफा दिया है। इनमें एंडोक्राइनिल मेडिसिन, गैस्ट्रो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, ट्रांसप्लांट यूनिट, सीवीटीएस, गठिया रोग, यूरोलॉजी, मनोरोग, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, कार्डियक एनेस्थीसिया, एनेस्थीसिया और प्लास्टिक सर्जरी जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं। इससे संस्थान में विशेषज्ञों की कमी महसूस की जा रही है।
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