केजीएमयू : यूरोलॉजी विभाग में तीन और अलमारियां खुलीं, तीन लाख की दवाएं बरामद

KGMU (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित दवा घोटाले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान पहले एक बर्खास्त कर्मचारी की अलमारी से करीब दो लाख रुपये मूल्य की दवाएं मिलने के बाद अब तीन अन्य अलमारियों का भी समिति की मौजूदगी में ताला तोड़ा गया। इन अलमारियों से भी लगभग तीन लाख रुपये की दवाएं बरामद होने का दावा किया गया है। जांच समिति ने सभी बरामद दवाओं को अपने कब्जे में लेकर उनके स्टॉक और खरीद रिकॉर्ड का मिलान शुरू कर दिया है। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

तीन और अलमारियों से मिलीं दवाएं:

सोमवार को जांच समिति की निगरानी में बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की तीन और अलमारियों का ताला खोला गया। जांच के दौरान इनमें से करीब तीन लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। इससे पहले एक अन्य कर्मचारी की अलमारी से लगभग दो लाख रुपये की दवाएं मिलने की जानकारी सामने आई थी। समिति अब सभी बरामद दवाओं का रिकॉर्ड तैयार कर उनके स्रोत और वितरण प्रक्रिया की जांच कर रही है।

सरकारी योजनाओं की दवाएं मिलने का दावा:

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बरामद दवाएं Ayushman Bharat (आयुष्मान भारत), Mukhyamantri Rahat Kosh (मुख्यमंत्री राहत कोष), Pradhan Mantri Rahat Kosh (प्रधानमंत्री राहत कोष) तथा अन्य सरकारी योजनाओं के बजट से खरीदी गई थीं। जांच में यह देखा जा रहा है कि मरीजों तक पहुंचने के बजाय ये दवाएं कर्मचारियों की अलमारियों तक कैसे पहुंचीं। जांच अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम में शामिल परिस्थितियों और संभावित जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटे हैं।

प्रशासन ने शुरू की सख्त कार्रवाई:

KGMU (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत करीब डेढ़ करोड़ रुपये के कथित दवा घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक तीन संविदा कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया है। विभागाध्यक्ष को भी उनके पद से हटाया गया है। वहीं, एक बर्खास्त संविदा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

एजेंसी से होगी वसूली की प्रक्रिया:

प्रशासन ने इस मामले में मैनपावर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर की होगी जांच:

KGMU (केजीएमयू) के प्रवक्ता Dr. KK Singh (डॉ. केके सिंह) ने बताया कि जांच समिति बरामद दवाओं, खरीद प्रक्रिया, वितरण रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का विस्तृत मिलान कर रही है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि दवाओं की खरीद और वितरण में कहीं कोई अनियमितता हुई या नहीं।

अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच:

Dr. KK Singh (डॉ. केके सिंह) के अनुसार, यदि जांच के दौरान किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कई स्तरों पर जारी है और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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