लखनऊ (Lucknow) स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (King George’s Medical University–KGMU) के परिसर में मजारों को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर में चिन्हित मजारों को हटाने के लिए नोटिस चस्पा किए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि तय समय सीमा बीतने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके चलते अब दूसरा नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परिसर के भीतर और बाहर विरोध भी सामने आ रहा है।
KGMU प्रशासन ने परिसर में मौजूद मजारों को अतिक्रमण की श्रेणी में रखते हुए 23 जनवरी को पहला नोटिस जारी किया था। नोटिस के माध्यम से संबंधित पक्षों को 15 दिन के भीतर मजारों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन का दावा है कि निर्धारित अवधि समाप्त हो जाने के बावजूद किसी भी स्थान से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे अब आगे की कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

पहला नोटिस और प्रशासन का पक्ष:
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार KGMU (King George’s Medical University) परिसर में कुल पांच मजारों को चिन्हित किया गया है। इनमें क्वीन मेरी गेट (Queen Mary Gate), ट्रॉमा सेंटर (Trauma Centre), माइक्रोबायोलॉजी विभाग (Department of Microbiology) और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग (Department of Respiratory Medicine) के आसपास स्थित मजारें शामिल हैं। इसके अलावा आर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन (Orthopaedic Super Speciality Building) और टीजी हॉस्टल (TG Hostel) क्षेत्र में भी मजारों की मौजूदगी पाई गई है। प्रशासन का कहना है कि ये सभी संरचनाएं संस्थान की भूमि पर बिना अनुमति के स्थापित हैं।
15 दिन बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस:
KGMU प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि पहला नोटिस जारी किए जाने के बाद 15 दिन का समय दिया गया था ताकि संबंधित लोग स्वयं अतिक्रमण हटा सकें। हालांकि, इस अवधि के समाप्त होने के बाद भी किसी भी स्थान पर स्थिति में बदलाव नहीं आया। इसी कारण अब प्रशासन दूसरे नोटिस की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह नोटिस सोमवार को जारी किया जाएगा और इसके बाद आगे के विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
दूसरे नोटिस के बाद संभावित कदम:
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक दूसरा नोटिस अंतिम चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो विश्वविद्यालय प्रबंधन कानून के दायरे में रहते हुए अन्य विकल्पों पर गौर करेगा। प्रशासन का कहना है कि परिसर में मरीजों, डॉक्टरों और छात्रों की आवाजाही को देखते हुए किसी भी प्रकार का अतिक्रमण सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से उचित नहीं है।
विरोध और असहमति की आवाजें:
मजारों को नोटिस चस्पा किए जाने के बाद से इस निर्णय का बड़े पैमाने पर विरोध भी सामने आ रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि मजारें लंबे समय से वहां मौजूद हैं और इन्हें हटाने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन के कदम को एकतरफा बताते हुए आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन यह स्पष्ट कर रहा है कि यह मामला आस्था से नहीं बल्कि अतिक्रमण और संस्थान की नियमावली से जुड़ा हुआ है।
संस्थान की भूमि और नियमों का सवाल:
KGMU (King George’s Medical University) प्रशासन का तर्क है कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान है, जहां नियमों और कानूनों के तहत ही किसी भी निर्माण या संरचना की अनुमति दी जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि परिसर की भूमि का उपयोग केवल चिकित्सा सेवाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और मरीजों की सुविधा के लिए किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण भविष्य में समस्याएं खड़ी कर सकता है।
आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर:
अब सभी की निगाहें सोमवार को जारी होने वाले दूसरे नोटिस पर टिकी हैं। प्रशासन के इस कदम के बाद यह साफ हो जाएगा कि आगे किस दिशा में कार्रवाई की जाएगी। एक ओर जहां विश्वविद्यालय प्रबंधन कानून और नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले पक्ष अपनी आपत्तियों को सामने रख रहे हैं। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
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