लखनऊ में केजीएमयू के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर तीन साल की बच्ची को नया जीवन दिया है। खेलते समय बच्ची के सिर में रिवॉल्वर की बुलेट धंस गई थी, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी। परिजन उसे तत्काल केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने जोखिम भरा लेकिन जीवनरक्षक ऑपरेशन करने का फैसला लिया। डॉक्टरों की सूझबूझ, टीमवर्क और तकनीकी दक्षता के चलते बच्ची की जान बचाई जा सकी।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची बच्ची:
घटना के समय बच्ची की हालत चिंताजनक थी। काफी खून बह चुका था और वह बेहोशी की स्थिति में थी। डॉक्टरों ने जब सिटी स्कैन कराया तो पता चला कि बुलेट बच्ची के सिर के अंदर घूम रही है। यह स्थिति सामान्य मामलों से अलग थी, जिससे सर्जरी और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, बच्ची की स्थिति बिगड़ती जा रही थी।
चलायमान बुलेट बनी बड़ी चुनौती:
जांच में सामने आया कि बच्ची के सिर के भीतर बुलेट स्थिर नहीं थी बल्कि उसकी लोकेशन बार-बार बदल रही थी। डॉक्टरों के लिए यह एक बेहद कठिन स्थिति थी क्योंकि सर्जरी के दौरान बुलेट की सटीक जगह पता करना जरूरी था। न्यूरो सर्जरी टीम ने सावधानीपूर्वक रणनीति बनाकर आगे की प्रक्रिया तय की।
नीडल की मदद से बुलेट की लोकेशन तय:
डॉक्टरों ने बच्ची के सिर में एक साथ 9 नीडल डालकर बुलेट की सटीक लोकेशन का पता लगाया। यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील थी क्योंकि थोड़ी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी। कई स्तरों पर जांच और पुष्टि के बाद ऑपरेशन शुरू किया गया।

साढ़े चार घंटे चला जटिल ऑपरेशन:
लगातार साढ़े चार घंटे तक चली सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बुलेट को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के दौरान हर कदम बेहद सावधानी से उठाया गया। सर्जरी पूरी होने के बाद बच्ची को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां उसकी लगातार निगरानी की गई।
डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका:
इस जटिल सर्जरी के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई थी। टीम में केजीएमयू के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. बीके ओझा के साथ कुल पांच डॉक्टर शामिल रहे। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया के अनुभवी डॉक्टरों को भी टीम में जोड़ा गया। सभी ने समन्वय के साथ काम कर ऑपरेशन को सफल बनाया।
इलाज के बाद हालत में तेजी से सुधार:
सर्जरी के करीब 40 दिन बाद बच्ची की स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला है। डॉक्टरों के अनुसार अब उसकी हालत स्थिर है और वह सामान्य गतिविधियों की ओर लौट रही है। अगले दो दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है।
परिवार की आर्थिक स्थिति और सहयोग:
डॉ. अंकुर बजाज ने बताया कि बच्ची के माता-पिता कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं। इलाज के लिए एनजीओ की भी मदद ली गई। राहत की बात यह रही कि इतनी जटिल सर्जरी के बावजूद इलाज का कुल खर्च 40 हजार रुपये से कम रहा। सर्जरी के बाद बच्ची को लगभग एक सप्ताह तक आईसीयू में रखा गया।
कैसे हुआ हादसा:
बस्तौली गांव में रहने वाले रमेश की तीन साल की बेटी लक्ष्मी 17 दिसंबर को घर की छत पर बने टीन शेड के नीचे खेल रही थी। उसके साथ उसके दो भाई सौभाग्य और हिमांश भी मौजूद थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज हुई और लक्ष्मी के सिर से खून निकलने लगा। परिजन उसे तुरंत पास के अस्पताल लेकर गए।
पहले इलाज में नहीं चला बुलेट का पता:
परिजन लक्ष्मी को मेघना अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर में टांके लगा दिए। हालांकि, बाद में उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। इसके बाद उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में सिर में गोली फंसी होने की पुष्टि हुई। बेड उपलब्ध न होने के कारण उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया और फिर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
पुलिस जांच में उलझी गुत्थी:
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की। छत पर टीन में गोली का निशान मिला। आसपास के घरों में भी पूछताछ की गई, लेकिन जांच में यह सामने आया कि न तो परिवार और न ही आसपास के किसी घर में लाइसेंसी हथियार है। ऐसे में गोली कहां से आई, यह पुलिस के लिए अब भी एक पहेली बना हुआ है।
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