इमरजेंसी लैंडिंग के बाद खुली पोल, केशव मौर्य का हेलिकॉप्टर 18 साल पुराना

उत्तर प्रदेश में डिप्टी सीएम केशव मौर्य (Keshav Prasad Maurya) के हेलिकॉप्टर की हाल ही में हुई इमरजेंसी लैंडिंग के बाद उसकी तकनीकी स्थिति और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 7 मार्च को लखनऊ एयरपोर्ट (Lucknow Airport) पर जिस हेलिकॉप्टर को आपात स्थिति में उतारा गया, वह करीब 18 साल पुराना बताया जा रहा है। नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस हेलिकॉप्टर की पिछले तीन वर्षों से कोई बड़ी मरम्मत नहीं हुई है। पिछले आठ वर्षों में यह चौथी बार है जब इसी हेलिकॉप्टर को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है, जिसके कारण इसकी तकनीकी जांच और रखरखाव को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

पुराना हेलिकॉप्टर होने से उठे तकनीकी सवाल:
अधिकारियों के मुताबिक डिप्टी सीएम केशव मौर्य के उपयोग में आने वाला हेलिकॉप्टर बेल 412 EP (Bell 412 EP) नागरिक उड्डयन विभाग (Civil Aviation Department) के बेड़े में शामिल पुराने हेलिकॉप्टरों में से एक है। यह हेलिकॉप्टर वर्ष 2008 में सिंगापुर की कंपनी बेल हेलिकॉप्टर टेक्सट्रॉन (Bell Helicopter Textron) से खरीदा गया था।
बताया गया कि वर्ष 2023 में इस हेलिकॉप्टर के कुछ जरूरी तकनीकी हिस्सों की मरम्मत और ओवरहॉलिंग की गई थी। उस समय इसके दो मुख्य रोटर ब्लेड पार्ट बदले गए थे, जिन पर लगभग 99 लाख 99 हजार 528 रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद इस हेलिकॉप्टर में किसी बड़े मरम्मत कार्य की जानकारी सामने नहीं आई है।

आठ साल में चौथी बार इमरजेंसी लैंडिंग:
बीते आठ वर्षों के दौरान केशव मौर्य के हेलिकॉप्टर को चार बार आपात स्थिति में उतारना पड़ा है। हाल की घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि उड़ान से पहले तकनीकी जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जाती है और संभावित खराबी पहले क्यों नहीं पकड़ में आ सकी।
इसी घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई और मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणी की। 7 मार्च को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे इस विषय पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि संभव है केशव मौर्य को नया हेलिकॉप्टर उपलब्ध नहीं हुआ हो।
इसके बाद यह चर्चा भी तेज हो गई कि राज्य सरकार द्वारा हाल में खरीदा गया नया हेलिकॉप्टर किसके उपयोग में है और उसे किन परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने खरीदा नया आधुनिक हेलिकॉप्टर:
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने हाल ही में एक आधुनिक हेलिकॉप्टर अगस्ता AW 139 (Agusta AW 139) खरीदा है। इस हेलिकॉप्टर की कीमत लगभग 120 से 130 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। इसे इटली की कंपनी मेसर्स लियोनार्डो (Leonardo) से खरीदा गया था।
फिलहाल इस हेलिकॉप्टर का उपयोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और अन्य वीवीआईपी मेहमानों की उड़ानों के लिए किया जा रहा है। इस हेलिकॉप्टर के संचालन के लिए कैप्टन अक्षय जासवाल (Akshay Jaiswal), अमित भूटानी (Amit Bhutani) और राजेश कुमार शर्मा (Rajesh Kumar Sharma) को विशेष क्रिटिकल इमरजेंसी ट्रेनिंग दी गई है। इस प्रशिक्षण पर लगभग 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। यह हेलिकॉप्टर आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के कारण सुरक्षित श्रेणी में गिना जाता है।

प्रदेश में कब-कब खरीदे गए हेलिकॉप्टर और विमान:
पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में विभिन्न समयों पर सरकारों ने कई हेलिकॉप्टर और विमान खरीदे हैं। वर्ष 1995 में राज्य सरकार ने पहला हेलिकॉप्टर बेल 230 (Bell 230) खरीदा था, उस समय मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) थीं।
इसके बाद वर्ष 2008 में बेल 412 EP हेलिकॉप्टर खरीदा गया। वर्ष 2009 में विमान वीटी यूपीएम हॉकर 900 एक्सपी (VT UPM Hawker 900 XP) जेट टाइप शामिल किया गया। वहीं वर्ष 2010 में विमान वीटी यूपीएल अगस्ता A-109 S (VT UPL Agusta A-109 S) भी खरीदा गया था।
वर्तमान में वर्ष 2026 तक लखनऊ एयरपोर्ट (Lucknow Airport) के हैंगर में राज्य सरकार के पांच हेलिकॉप्टर और तीन विमान मौजूद बताए जाते हैं।

पायलट प्रशिक्षण पर भी खर्च:
नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हेलिकॉप्टर और विमानों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर उनकी तकनीकी जांच और ओवरहॉलिंग कराई जाती है। साथ ही पायलटों को क्रिटिकल इमरजेंसी ट्रेनिंग और इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट ट्रेनिंग भी दी जाती है।
राज्य सरकार के पास करीब 10 पायलट कार्यरत हैं और सभी संविदा पर नियुक्त बताए जाते हैं। इनमें कैप्टन सुनील कोरा (Sunil Kora), कैप्टन सुनील श्रीवास्तव (Sunil Srivastava), कैप्टन जीएस पड्‌डा (GS Padda), कैप्टन अमित कुमार भूटानी (Amit Kumar Bhutani), कैप्टन एसके गिरी (SK Giri), कैप्टन अनूप श्रीवास्तव (Anup Srivastava), कैप्टन दीपक श्रीवास्तव (Deepak Srivastava), कैप्टन अक्षय जासवाल (Akshay Jaiswal) और कैप्टन राजेश कुमार शर्मा (Rajesh Kumar Sharma) शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक पायलट के प्रशिक्षण पर लाखों रुपये खर्च होते हैं।

स्थायी पायलट भर्ती को लेकर चर्चा:
जानकारों के अनुसार बसपा (BSP) सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने अपने स्टेट पायलट शशांक शेखर (Shashank Shekhar) को सरकार में कैबिनेट सचिव बनाया था। बताया जाता है कि उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
हालांकि कुछ प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि उस समय के बाद स्थायी पायलटों की भर्ती की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई और कई वर्षों से पायलट संविदा पर ही काम कर रहे हैं।

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