देश के पहले शहरी रोप-वे से काशी में जाम की झंझट खत्म, 1 घंटे का सफर अब 15 मिनट में
देश में रोप-वे का उपयोग अब तक केवल पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन के साधन के रूप में होता रहा है, लेकिन अब Varanasi (वाराणसी) की तंग और व्यस्त गलियों के ऊपर से भी रोप-वे का संचालन किया जाएगा। यह देश का पहला और दुनिया का तीसरा अर्बन ट्रांसपोर्ट रोप-वे प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो Varanasi (वाराणसी) में लगभग पूर्णता की ओर है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद Varanasi Cantt (वाराणसी कैंट) से Godowlia Chowk (गोदौलिया चौक) तक लगभग 4 किलोमीटर की दूरी मात्र 15 मिनट में तय की जा सकेगी, जबकि वर्तमान में इसी दूरी को तय करने में करीब 1 घंटे का समय लग जाता है। प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेंद्र मोदी) के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल यह रोप-वे न केवल समय की बचत करेगा बल्कि ईंधन खपत और ट्रैफिक दबाव को भी काफी हद तक कम करेगा। लगभग 815 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट आधुनिक परिवहन और काशी की सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम माना जा रहा है।
प्रोजेक्ट की प्रगति और स्टेशनों की स्थिति:
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसके नवंबर तक उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है। कुल 5 स्टेशनों में से 3 स्टेशन—Varanasi Cantt (वाराणसी कैंट), Vidyapeeth (विद्यापीठ) और Rath Yatra (रथयात्रा)—पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि Girjaghar (गिरजाघर) और Godowlia Chowk (गोदौलिया चौक) पर कार्य अंतिम चरण में है। इन सभी स्टेशनों को मेट्रो स्टेशन की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जहां वाणिज्यिक स्थान, बजट होटल और रेस्तरां जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। जिन स्थानों पर निर्माण पूरा हो चुका है वहां रोप-वे की लोड टेस्टिंग भी लगभग संपन्न हो चुकी है।
तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था:
रोप-वे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाली केबल कारों के साथ-साथ 800 किलोग्राम वजन वाली रेत की बोरियों के साथ लोड टेस्टिंग की गई है। परीक्षण के दौरान केबल कारों को 6 मीटर प्रति सेकेंड यानी लगभग 21 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाया गया है। एक बार में तीन-तीन केबल कारों का संचालन कर मोटर, केबल, ब्रेकिंग सिस्टम, स्पीड और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई है। इस परियोजना में Switzerland (स्विट्जरलैंड) और Austria (ऑस्ट्रिया) के विशेषज्ञों की निगरानी में अंतिम सुरक्षा जांच भी प्रस्तावित है।
किराया, क्षमता और संचालन व्यवस्था:
National Highways Logistics Management Limited (नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड) के PRO Manoj Kumar (मनोज कुमार) के अनुसार, किराया संरचना भी तय की गई है, जिसमें Cantt से Vidyapeeth तक 30 रुपये, Rath Yatra तक 40 रुपये और Godowlia Chowk तक 50 रुपये किराया प्रस्तावित है। इस रोप-वे में कुल 30 टावर होंगे, जिनकी ऊंचाई 40 से 150 फीट तक होगी। पूरे कॉरिडोर में 148 केबल कारें संचालित होंगी, जिनमें प्रत्येक में 10 यात्री बैठ सकेंगे। इस प्रकार एक समय में 1480 यात्री यात्रा कर सकेंगे और प्रति घंटे लगभग 6000 यात्रियों के परिवहन की क्षमता होगी। दिन में 16 घंटे संचालन के आधार पर प्रतिदिन लगभग 90 हजार से 1 लाख यात्रियों के सफर का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी 15 वर्षों तक National Highways Logistics Management Limited (नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड) और Vishwa Samudra Engineering (विश्वा समुद्र इंजीनियरिंग) को सौंपी गई है।
सुरक्षा तकनीक और निगरानी प्रणाली:
रोप-वे में 3 स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। सभी 30 टावरों पर सेंसर लगाए गए हैं, जो लगातार दबाव और तकनीकी स्थिति का डेटा उपलब्ध कराते रहेंगे। पूरे सिस्टम को SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे 24 घंटे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। रोप-वे की डिजाइनिंग Switzerland (स्विट्जरलैंड) की Bartholett Maschinenbau AG (बार्थोलेट मशीननबाऊ एजी) तकनीक से की गई है, जबकि केबल कारों का डिजाइन Germany (जर्मनी) की Porsche Design Studio (पोर्श डिजाइन स्टूडियो) द्वारा तैयार किया गया है।
आपातकालीन सुविधा और संचालन प्रबंधन:
सभी पांचों स्टेशनों पर 24 घंटे मेडिकल और एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध रहेगी। किसी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रत्येक स्टेशन पर क्रेन भी तैनात की जाएगी। इसके माध्यम से किसी भी तकनीकी या आपात स्थिति में केबल कार से यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सकेगा।
काशी के परिवहन में ऐतिहासिक बदलाव:
यह रोप-वे प्रोजेक्ट Varanasi (वाराणसी) के शहरी परिवहन में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाला माना जा रहा है। इससे काशी Vishwanath Temple (काशी विश्वनाथ मंदिर) और Dashashwamedh Ghat (दशाश्वमेध घाट) तक पहुंचने वाले ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। वर्तमान में पहाड़ी क्षेत्रों में ही रोप-वे की सुविधा देखने को मिलती है, लेकिन Varanasi (वाराणसी) में यह पहली बार किसी शहर की तंग गलियों के ऊपर से संचालित होने वाला प्रोजेक्ट है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी और लोगों के समय व ईंधन दोनों की बचत होगी। यह परियोजना Varanasi (वाराणसी) को देश के आधुनिक परिवहन शहरों की सूची में एक नई पहचान दिलाएगी।
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