कासगंज में पराली जलाने की लापरवाही, फतेहपुर गांव में बढ़ा आग का खतरा

रिपोर्ट: जुम्मन कुरैशी

कासगंज (Kasganj): जनपद कासगंज में प्रशासन द्वारा लगाए गए सख्त प्रतिबंध के बावजूद किसान खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। पराली जलाने की यह समस्या अब चिंता का विषय बन चुकी है क्योंकि इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है बल्कि किसी भी समय बड़ा हादसा होने का खतरा भी मंडराता रहता है।

प्रतिबंध के बावजूद जल रही पराली:
कासगंज जनपद के कई क्षेत्रों में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन द्वारा कई बार चेतावनी देने और सख्त कार्रवाई की बात कहने के बावजूद किसान पुराने तरीके से खेतों को साफ करने के लिए पराली में आग लगा रहे हैं।

पहले भी हो चुकी कार्रवाई:
जानकारी के अनुसार, बीते वर्षों में पराली जलाने को लेकर कई किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पर्यावरण विभाग (Environment Department) और जिला प्रशासन (District Administration) द्वारा बार-बार अपील की जा रही है कि किसान पराली को जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाएं, लेकिन इसके बावजूद भी स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है।

फतेहपुर गांव की वायरल तस्वीरें:
कासगंज की तहसील पटियाली (Patiyali) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फतेहपुर गांव के पास खेतों में पराली जलाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि किसान खेतों में आग लगाकर पराली को नष्ट कर रहे हैं, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में धुआं फैल गया है।

कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा:
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों में जल रही पराली से कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती है। आग की लपटें बढ़ने पर यह न केवल फसलों को बल्कि आसपास के घरों और पशुओं को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन की निगरानी बढ़ाने की जरूरत:
विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती और बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे डीकंपोजर (Decomposer) या मशीनों के उपयोग के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

निष्कर्ष:
कासगंज में पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन की अपीलों और पूर्व की कार्रवाइयों के बावजूद किसानों की आदतें नहीं बदल रही हैं। अब जरूरत है कि सख्ती के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी फोकस किया जाए ताकि प्रदूषण और हादसों से जनपद को बचाया जा सके।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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