वंदे मातरम पर रार: नहीं बदलेगा कर्नाटक सरकार का रुख, सीएम शिवकुमार बोले- फैसले पर रहेंगे कायम, भाजपा ने घेरा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (D.K. Shivakumar) ने बुधवार को वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के रुख के अनुरूप चलने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाने के पार्टी के फैसले का पालन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पार्टी के इस निर्णय के साथ हैं।
यह बयान कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम के सभी छह पद गाए जाने की बात सामने आने के बाद आया। शिवकुमार ने कहा कि सभी छह पद गाए जाने का फैसला उनकी जानकारी के बिना लिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के कार्यक्रमों में आगे भी शुरुआती दो पद गाने के तय रुख का ही पालन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने क्या कहा:
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से जब स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम को पूरा नहीं गाए जाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी की विचारधारा में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो फैसला किया है, वह उसी पर कायम हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि उनकी जानकारी के बिना या राज्यपाल भवन में ऐसा निर्णय लिया गया हो। हालांकि, भविष्य में सरकार के किसी भी कार्यक्रम में पहले से तय निर्णय के अनुसार ही वंदे मातरम के शुरुआती दो पद गाए जाएंगे।
कांग्रेस के फैसले के साथ खड़े शिवकुमार:
डीके शिवकुमार ने कहा कि वह कांग्रेस के निर्णय के साथ हैं। उनके मुताबिक पार्टी की ओर से जो फैसला लिया गया है, उसी के अनुरूप सरकार भी अपने कार्यक्रमों में आगे बढ़ेगी।
वंदे मातरम को लेकर यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब इसके गायन के तरीके को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद दिखाई दे रहे हैं। कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा फैसला भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
तुष्टिकरण की राजनीति पर भी बयान:
मुख्यमंत्री ने भारतीय राजनीति में तुष्टिकरण की राजनीति से जुड़े सवाल पर कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी विविधता में विश्वास करती है। इसी दौरान उन्होंने भाजपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
शिवकुमार के बयान के बाद वंदे मातरम के गायन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस जहां अपने पुराने निर्णय के अनुरूप शुरुआती दो पदों के गायन पर जोर दे रही है, वहीं भाजपा की ओर से इसे लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने साधा निशाना:
मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ (Gaurav Vallabh) ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने संविधान की गरिमा बनाए रखने की शपथ ली है, उन्हें राष्ट्रगीत को लेकर ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए।
गौरव वल्लभ ने डीके शिवकुमार से सवाल करते हुए कहा कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है। उनके अनुसार, जब संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति राष्ट्रगीत का अपमान करता है तो यह संविधान के अपमान से भी जुड़ता है।
कर्नाटक चुनाव को लेकर भी भाजपा का हमला:
गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि यह रुख किसी खास धार्मिक समुदाय को खुश करने के उद्देश्य से अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस पूरे मामले को देख रही है।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि यदि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति संविधान का अपमान करता है तो आने वाले समय में कर्नाटक चुनाव और आम चुनाव में मुख्यमंत्री तथा उनकी पार्टी को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रगान के अपमान को स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की बात कही।
कांग्रेस कार्य समिति के फैसले से जुड़ा विवाद:
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्ल्यूसी (CWC) ने पिछले सप्ताह अपने वर्ष 1937 के प्रस्ताव को दोहराया था। इस प्रस्ताव के अनुसार सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाए जाने की बात कही गई थी।
यह निर्णय उस समय सामने आया, जब नए वंदे मातरम विधेयक में राष्ट्रीय गीत के सभी पदों को गाना जरूरी किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद वंदे मातरम के गायन के तरीके को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का बुधवार का बयान इसी विवाद के बीच आया है। उन्होंने पार्टी के फैसले के प्रति अपनी सहमति जताते हुए कहा कि सरकार आगे भी अपने कार्यक्रमों में कांग्रेस के तय रुख का ही पालन करेगी।
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