दिल्ली (Delhi) में संसद भवन (Parliament House) से करीब डेढ़ किलोमीटर दूरी पर स्थित कदीमी मस्जिद (Kadimi Masjid) इन दिनों चर्चा में है। लगभग 114 वर्ष पुरानी यह छोटी मस्जिद कृषि भवन (Krishi Bhawan) परिसर में मौजूद है और वक्फ बोर्ड (Waqf Board) की संपत्ति के रूप में दर्ज है। हाई सिक्योरिटी एरिया में होने के कारण आम लोगों का प्रवेश सीमित है और यहां प्रायः सरकारी कर्मचारी नमाज अदा करते हैं। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट (Central Vista Project) के रिडेवलपमेंट दायरे में आने के चलते इसके भविष्य को लेकर आशंका जताई जा रही है, हालांकि सरकार की ओर से इसे सुरक्षित रखने का भरोसा दिया गया है।
सेंट्रल विस्टा और मस्जिद का मुद्दा:
राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) से इंडिया गेट (India Gate) तक लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में चल रहे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कई इमारतों का पुनर्विकास प्रस्तावित है। वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले भी इसी परियोजना के दौरान तीन मजारें और एक मस्जिद हटाई जा चुकी हैं, जिससे आशंका और गहरी हुई है।
एडवोकेट मशरूर खान का पक्ष:
सेंट्रल विस्टा परियोजना के मार्ग में आने वाली छह मस्जिदों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट (High Court) का रुख करने वाले एडवोकेट मशरूर खान (Advocate Mashroor Khan) का कहना है कि अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन विभिन्न स्रोतों से मिल रही जानकारी के आधार पर वे दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मस्जिद को हटाने की कोशिश हुई तो वे न्यायालय जाएंगे।
1912 के नक्शे में उल्लेख:
एडवोकेट मशरूर के अनुसार, 1912 में ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियन (Edwin Lutyens) द्वारा तैयार किए गए नक्शे में कदीमी मस्जिद का उल्लेख मिलता है। उनका दावा है कि यह मस्जिद कृषि भवन के निर्माण से पहले से मौजूद थी और लुटियंस दिल्ली (Lutyens Delhi) के डिजाइन में इसे यथावत रखा गया। उनके मुताबिक यह केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक हैरिटेज प्रॉपर्टी भी है।
सुनहरी बाग मस्जिद का उदाहरण:
एडवोकेट मशरूर ने सुनहरी बाग मस्जिद (Sunehri Bagh Masjid) का उल्लेख करते हुए कहा कि जब नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) ने ट्रैफिक के कारण इसे हटाने का नोटिस दिया था, तब ऐतिहासिक और वक्फ रिकॉर्ड प्रस्तुत कर इसे बचाया गया। अदालत ने प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया और मस्जिद सुरक्षित रही।
तीन मजारें और अन्य मस्जिदें:
उद्योग भवन (Udyog Bhawan) क्षेत्र में स्थित तीन मजारों को हटाए जाने का भी जिक्र किया गया। उनका कहना है कि ये संरचनाएं लुटियंस दिल्ली से पहले की थीं और लंबे समय तक सुरक्षित रहीं, लेकिन हाल के वर्षों में इन्हें हटा दिया गया।
कागजी साक्ष्य और गजट नोटिफिकेशन:
कदीमी मस्जिद के समर्थन में 1912 का नक्शा, वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड, इतिहास पुस्तकों में उल्लेख और 1970 का गजट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) दस्तावेज के रूप में बताए गए हैं। वक्फ संपत्ति से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी परिवर्तन से पहले उचित कारण और प्रक्रिया आवश्यक है।
नए नक्शे में मस्जिद का जिक्र नहीं:
सार्वजनिक निर्माण विभाग (CPWD) ने कृषि भवन और शास्त्री भवन (Shastri Bhawan) के पुनर्विकास के लिए टेंडर जारी किया है। प्रस्तावित कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 के नक्शे में कदीमी मस्जिद का उल्लेख नहीं होने की बात कही जा रही है। संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण के लिए संपर्क किया गया है, हालांकि आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
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