आधुनिक खेती के दम पर बन गये विधायक हरेन्द्र सिंह माडल किसान

संवाददाता: विकास पाठक

केराकत । जनपद जौनपुर के ग्राम सेहमलपुर निवासी जफराबाद विधायक डा0 हरेन्द्र प्रताप सिंह एक जनप्रतिनिधि ही नहीं एक माडल किसान भी हैं । आज के दौर में घाटे की साबित हो रही खेती को अपनी मेहनत ,लगन व नयी तकनीकी के जरिए उन्होंने साबित कर दिखाया कि खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि फायदे का सौदा है। बशर्ते खेती करने वाला किसान अपनी जमीन से भरपूर प्यार कर इमानदारी दमदारी व समझदारी से खेती करे।
अपने पैतृक गांव सेहमलपुर में आज भी कई एकड़ भूमि में खेती करने वाले डा0 हरेन्द्र सिंह अपने ब्यस्ततम कार्य में रहते हुए वे समय निकाल कर खुद गांव पहुंच कर खेती की निगहबानी करना व देख भाल करना अपनी नियति बना रखे हैं ।एक एकड़ भूमि में पालीहाउस बनाकर दो वर्ष पूर्व जरबेरा फूल की खेती करना शुरु किया । जो इस वर्ष लाकडाउन के चलते तैयार उत्पाद फूल मार्केट में नहीं जा सकने से नुकसान उठाना पड़ा । हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी ।और उन्होंने फिर उसी जोश खरोश के साथ पाली हाउस में वर्मी खाद ,मटर ,धनिया ,लहसुन, चुकन्दर गोभी एवं बैगन आदि की खेती पाली हाउस में उगाकर अपने को माडल किसान की श्रेणी में स्थापित करने में सफल रहे।आज भी जनपद जौनपुर के विभिन्न अंचलो के साथ समीपवर्ती जिले वाराणसी, गाज़ीपुर आज़मगढके किसान आज भी खेती के गुर सीखने आते हैं । डा0 सिंह का यह भी कहना है कि आज पूरी दुनिया तरह तरह बीमारियों व रोगों से जूझ रही है। सभी लोग स्वस्थ रहने हेतु कम्पोस्ट खाद(नाडेप,वर्मी ,) से उत्पादित खाद्यान्न का सेवन करना चाहते हैं ।

विधायक डा0 सिंह ने कहा कि आज नौजवान जो खेती से मुख मोड़ कर नौकरी व आदि जाबो के लिये गांव से महानगरों की पलायन कर रहा है। ऐसे शिक्षित बेरोजगार को मेरा संदेश है कि वे अपनी ईमानदारी जिम्मेदारी , वफादारी व दमदारी से खेती से अपने को जोड़ कर आधुनिक खेती करें तो निश्चित ही वे काफी सफल होंगे ।उन्होंने बताया कि गांव में मैने कृषि विज्ञान को बढ़ावा देने हेतु अपनी एक संस्था रामअधार सिंह महाविद्यालय सेहमल के नाम 27 बीघा एक भूमि समर्पित कर दिया , बी एस सी एग्रीकल्चर सब्जेक्ट की मान्यता ली है ताकि नौजवान छात्र छात्राएँ खेती के गुर सीखकर धरा पर प्रैक्टिकली खेती करना सीख सकें। और खेती के प्रति आकर्षित हो सके ।उन्होंने कहा कि खेती पर केन्द्र व प्रदेश सरकार विशेष ध्यान दे रही है ताकि किसान खेती के जरिए अपनी आय दुगुनी कर सके। इसमे फल सब्जी मत्स्य पालन, डेयरी इत्यादि शामिल है।

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