दिग्विजय बोले- हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिम आबादी घटी


Jhansi: झाँसी में कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और देश की जनसांख्यिकी पर एक बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। दतिया में पीतांबरा पीठ के दर्शन करने के बाद सर्किट हाउस पहुँचे दिग्विजय सिंह ने आरएसएस पर सीधे तौर पर देश में दंगे भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने आरएसएस को एक अपंजीकृत संस्था (नॉन-रजिस्टर्ड संस्था) बताते हुए कहा कि इस संगठन के लोग मिलकर दंगे करवाते हैं। जब कोई घटना होती है, तो आरएसएस यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि वह व्यक्ति उनका सदस्य नहीं है। दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि जब संस्था का कोई आधिकारिक पंजीकरण ही नहीं है, तो उसके सदस्य कहाँ से होंगे?



दंगे: सरकार और अफसरों की नीयत पर निर्भर:


दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर सरकार वास्तव में चाहे तो देश में दंगे कभी नहीं हो सकते। उनका मानना है कि दंगों का होना पूरी तरह से सरकार और संबंधित अफसरों की नीयत पर निर्भर करता है। उन्होंने जोर दिया कि दंगों को रोकने के लिए समय रहते और सही कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने संवेदनशील मामलों में सरकारी उदासीनता और अधिकारियों की निष्क्रियता को दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया।

मुस्लिम आबादी का घटना: तथ्यों की अनदेखी का आरोप:


कांग्रेस नेता ने आरएसएस के इस प्रचार को खारिज कर दिया कि देश में मुसलमानों की जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है और यह हिंदुओं की संख्या को पार कर जाएगी। उन्होंने कहा कि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, हिंदुओं की जनसंख्या जितनी तेज़ी से घट रही है, मुस्लिमों की जनसंख्या उससे कहीं ज्यादा तेज़ी से घट रही है। उन्होंने 2001 और 2011 के बीच के जनसंख्या ग्राफ को इस बात का प्रमाण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 2021 की जनगणना रिपोर्ट को जानबूझकर रोककर रखा है, ताकि ये तथ्य लोगों के सामने न आ सकें। उनका आरोप था कि आरएसएस और सरकार मिलकर हिंदुओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

आरएसएस के फंड और एजेंडे पर सवालिया निशान:


दिग्विजय सिंह ने आरएसएस द्वारा की जाने वाली चंदा वसूली की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने पूछा कि विजयादशमी और गुरु पूर्णिमा पर करोड़ों रुपये चंदे में आते हैं, तो यह पैसा कहाँ जाता है? उन्होंने संगठन से उसके बैंक खाते की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि जब संघ का अकाउंट ही नहीं है, तो इस विशाल राशि का हिसाब कहाँ रखा जाता है। उनके मुताबिक, आरएसएस का एकमात्र एजेंडा है हिंदुओं को भड़काना और संविधान के विरुद्ध लोगों को बचपन से तैयार करना। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस कभी आंदोलन या प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि हमेशा पर्दे के पीछे से कानाफूसी की राजनीति करता है।

‘I LOVE मोहम्मद’ पर एफआईआर की आवश्यकता क्या?:


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विषय पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति “आई लव मोहम्मद” कहता है और कोई दूसरा व्यक्ति “आई लव राम जी, आई लव महादेव, आई लव कृष्ण भगवान या आई लव गांधी जी” कहता है, तो इसमें किसी को दिक्कत क्यों होनी चाहिए। उन्होंने इस तरह के बयानों पर मुकदमा दर्ज करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसे मामलों पर एफआईआर दर्ज करना भी दंगों को हवा देने जैसा है, जो अंततः सरकार और अफसरों की नीयत पर निर्भर करता है।

भड़काऊ लोग सभी समुदायों में मौजूद:


बरेली के मौलवी तौकीर रजा से जुड़े एक सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस तरह कुछ फितरती और भड़काऊ लोग मुस्लिम समाज में हैं, उसी तरह ऐसे लोग हिंदू समाज में भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल भड़काऊ भाषण देने का काम करते हैं और सरकार को ऐसे तत्वों के खिलाफ समय से कदम उठाना चाहिए।

बुलडोजर कार्रवाई और न्याय का सिद्धांत:


संभल में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि निर्माण अवैधानिक है, तो उस पर कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिए। लेकिन, उन्होंने न्याय के सिद्धांत पर बल देते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति के अपराध के लिए उसके पूरे परिवार को दंड देना या उसकी संपत्ति पर कार्रवाई करना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून में दोषी को ही सजा देने का प्रावधान है।

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