IS-191: मुख्तार के अंत की शुरुआत…

IS-191 Part 1: सन्नाटा उसके खौफ़ का था या खौफ़ था ही नहीं… 28 मार्च 2025 को मुख्तार अंसारी के मृत्यु के एक वर्ष बीत गये, परिवार ने फैसला किया कि बरसी 28 को नहीं बल्कि 30 मार्च को मनाई जाएगी लेकिन अचानक से ये फैसला बदल जाता है और बरसी 28 मार्च को ही मनाई गयी… परिवार के कुछ शुभचिंतक मौजूद रहे और शाम को मुख्तार की कब्र पर फातिहा पढ़ी गई। परिवार की निगाहें किसी को तालाश रही थी, वो जो पिता की कुर्सी पाने के बाद भी अपने पिता के शुभचिंतकों की सेवा न कर सका, वो जिसने राजनीति के रंग को जेल के अँधेरे से पहचानना शुरू किया, वो जो चाह कर भी बरसी पर पिता के कब्र पर पहुँच ना सका… कमी केवल उसकी नहीं थी, उस कब्र को इंतेज़ार तो उसका भी था, जिसके लिए वो कभी, टाउन हॉल के मैदान से छक्के मारा करता था…

शुभचिंतकों का सवाल था कि यदि खौफ़ था तो वो खौफ़ उस दिन कहाँ था, जब उसके जनाज़े पर सन्नाटे को चीर कर भीड़ उसके कब्र पर फूल चढाने को बेकरार थी, क्या कोई ख़ौफ़ज़दा किसी खौफ़नाक शख्स के कब्र पर फूल चढाने को बेकरार होगा, क्या कोई ख़ौफ़ज़दा किसी खौफ़नाक शख्स के जनाजे में उसे अंतिम बार देखने के लिए बेताब होगा? यदि धर्म के नाम पर खड़ी भीड़ थी तो उसमे सर्व धर्म के लोग क्यों नज़र आ रहे थे? लेकिन सवाल यही था कि उसके जीवन में सन्नाटा उसके खौफ़ का था या खौफ़ था ही नहीं…

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90 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्थिरता नहीं थी। सपा-बसपा और बीजेपी बराबर पर खड़े थे। कांग्रेस पिछड़ रही थी। अपराध के आरोपी राजनीति के ताकत को भाप गये थे और किसी की पुस्तैनी राजनीति पर अपराध, अपना धब्बा लागने को बेताब था… इसमें सबसे ज्यादा चर्चा हुई उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की… पूर्वांचल…20 से ज्यादा जिलों का समूह। जब भी इसकी बात होती है, आंखों के सामने बाहुबली, गैंगस्टर और माफिया घूमने लगते हैं। एक से बढ़कर एक अपराधी और उनका ऊंचा सियासी कद। ठेका रेलवे के स्क्रैप का हो, शराब का हो या फिर कोई किडनैपिंग का मामला। कोई वर्चस्व और गलत धंधे के संरक्षण के लिए राजनीति का सहारा लेता तो कोई विरोधाभास में अपराधी बन जाता, कृष्णानंद राय गाज़ीपुर के मोहम्दाबाद में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे थे तो वहीँ उस वक्त मुख्तार अंसारी ने बसपा जॉइन किया और मऊ सीट पर बीजेपी के विजय प्रताप सिंह को 26 हजार वोट से हराकर चुनाव जीत लिया। इधर ब्रजेश सिंह का नाम कुछ बड़े मामलों में सामने आने लगा, मुख्तार और ब्रजेश में किसी तरह का कोई आपसी विवाद नहीं था, लेकिन दोनों का ग्रुप अलग था, अदावत बढती गयी, दोनों ने एक-दूसरे को दुश्मन माना और 1990 आते-आते दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए। 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे के विध्वंश के बाद देश का माहौल गर्म था, पूर्वांचल में चारो तरफ से वर्चस्व की लड़ाई में गैंग सक्रीय होते गये, कुछ धर्म की भावना से प्रेरित थे कुछ जाति की, अपराध की कई कहानियां पन्नों में दर्ज होती गयीं, 2002 में बीजेपी नेता कृष्णानंद राय ने मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी को 7 हजार 7 सौ 72 वोट से हरा दिया। अपराध और राजनीति का मंथन हो रहा था, नए नए नाम अखबार की सुर्खियाँ बन रहे थे, राजनितिक वर्चस्व की लड़ाई में अख़बारों में नाम किसी और के थे और हत्या की साजिश कोई और रच रहा था, कब कौन किसके साथ था, इन्टरनेट और स्मार्टफ़ोन रहित उस दौर में ये समझ पाना मुश्किल सा था कि तभी 2005 में मऊ में दंगे हो गये, दंगों के दौरान मुख्तार अंसारी को खुली जीप में देखा गया, एक पक्ष कहता है कि दंगों में मुख्तार अंसारी का हाथ था, तो दूसरा पक्ष कहता है कि विधायक के नाते वो लोगों को शांत कराने गये थे, दंगों की ख़बर गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, योगी को हिंदुत्व का फायर ब्रांड नेता माना जाता था, वो मऊ की तरफ बढे लेकिन उन्हें दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था। इस घटना की आंच अभी शांत नहीं हुई थी, दो धर्मों के बिच की नफरत को आभी प्रेम का इंतेज़ार था कि 25 नवंबर 2005 को मोहम्दाबाद से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की गाड़ी पर हमला हो गया। हमला AK-47 से हुआ। कृष्णानंद राय समेत कुल 7 लोग मारे गए। पोस्टमॉर्टम हुआ तो सातों के शरीर से 67 गोलियां मिलीं। मर्डर ऐसे हुए कि विधायक की शरीर को गोलियों से भर दिया गया… राजनितिक अदावत अंसारी परिवार से थी, मुख़्तार के नाम का दबदबा था, कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी, अतहर रहमान उर्फ बाबू, मुन्ना बजरंगी, संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा के खिलाफ मामला दर्ज कराया और चर्चा में आया IS-191…

सुना है कोयले में से हिरा निकलता है लेकिन कोयला व्यापारियों के निगाह से कोयला इतना मूल्यवान होता है कि उसे ब्लैक डायमंड कहा जाता है, अब इस कहानी में हिरा कौन है ये तो नहीं पता लेकिन इस काले हीरे के धंधे ने उत्तर प्रदेश पर कई काले धब्बे जरुर लगाये हैं…

2005 में मुलायम सिंह यादव की सरकार उत्तर प्रदेश में थी, कृष्णानंद राय की हत्या के बाद भाजपा नेता राजनाथ सिंह चंदौली में धरने पर बैठ गये और जाँच की मांग करने लगे, इधर पूर्व सांसद मनोज सिन्हा न्याय की मांग करने लगे तभी 23 दिसंबर 2005 को लखनऊ में जौनपुर के एसएसपी अभय कुमार ने मीडिया से मुखातिब होते हुए खुलासा किया था कि कृष्णानंद राय की हत्या में शामिल एक शूटर को मार गिराया गया है, यह मारा गया शूटर कोई और नहीं बल्कि बिहार का रहने वाला नौशाद कुरैशी था, आरा भोजपुर का बेहद खतरनाक अपराधी नौशाद कुरैशी कोई और नहीं आरोप है कि उसका सम्बन्ध सिवान से था यानि शहाबुद्दीन से…

भाजपा सूबे में सत्ता की तलाश में थी, दंगों की खबर से उत्तर प्रदेश का माहौल गर्म था उसके बाद 7 सितम्बर 2008 को गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकाली, रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। योगी आदित्यनाथ काफिले में सातवें नंबर की लाल एसयूवी में बैठे थे। आरोप है कि तभी एक पत्थर उनकी गाड़ी पर आकर लगा। योगी के काफिले पर हमला हो चुका था। उस वक्‍त योगी ने ये सकेंत दे दिया कि हमला मुख्‍तार अंसारी ने करवाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थी, गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था पुलिस मौन बनी रही। तब न तो यूपी में बीजेपी की सरकार थी और न ही कोई पैठ…

2017 में उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल बदल गया, भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और मुख्यमंत्री के रेस में मनोज सिन्हा नाम सामने आ गया, तभी एक बड़ा निर्णय हुआ और योगी आदित्यनाथ सूबे के मुख्यमंत्री बन गये…

9 जुलाई 2018 कि सुबह उत्तर प्रदेश का बागपत जेल गोलियों की आवाज से गूंज उठा और मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वही मुन्ना बजरंगी जिसका नाम मुख्य रूप से कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड में सामने आया था, मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा ने भी तीन दिन पहले उसकी हत्या की आशंका जताते हुए याचिका दायर की थी।पुलिस मुन्ना बजरंगी को बी-वारंट पर नौ जुलाई 2018 को अदालत में पेश करने के लिए एक दिन पहले यानी आठ जुलाई की रात झांसी जेल से लेकर आई थी। पुलिस ने रात को बजरंगी को जिला कारागार में दाखिल कर दिया था। नौ जुलाई की सुबह उसकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। पहले से इस जेल में बंद कुख्यात सुनील राठी ने पुलिस के सामने मुन्ना बजरंगी की हत्या करना कबूल किया था। मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था, वह जौनपुर का रहने वाला था, वही जौनपुर जहाँ धनंजय सिंह का नाम भी खूब चर्चाओं में रहता है, मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह, रिटायर्ड डिप्टी एसपी जेएम सिंह, प्रदीप उर्फ पीके, महराज सिंह व विकास उर्फ राजा पर पति की हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी। मुन्ना बजरंगी पॉलिटिकल रूप से भी प्रभावशाली था।

मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में रखा गया था, तभी जनवरी 2019 में पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में रियल एस्टेट बिजनेसमैन से रंगदारी मामले में मुख़्तार की पंजाब में पेशी हुई, उसके बाद मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ जेल में बंद कर दिया गया…

जिस जिस अपराधी का नाम मुख्तार अंसारी से जुड़ा, उनके खात्मे की शुरुआत हो गयी… 9 अगस्त 2020 को लखनऊ में राकेश पांडे उर्फ हनुमान को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। चित्रकूट जेल में गैंगवार के दौरान राज़ुद्दीन उर्फ मेराज की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, बिजनौर में कनौजिया उर्फ जामवंत की भी जेल में मौत हो गई।

मुख्तार के रोपड़ जेल में रहते हुए जमकर सियासत हुई थी, बीजेपी और कांग्रेस ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए थे, केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार थी, 26 मार्च 2021 को, उत्तर प्रदेश सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि मुख्तार अंसारी की हिरासत दो हफ्ते के अंदर यूपी सरकार को सौंपी जाए, 7 अप्रैल 2021 को मुख्तार को फिर से बांदा जेल लाया गया… उसके बाद खबर आई कि 12 दिसंबर 2021 को लखनऊ में महेंद्र जायसवाल की गोली मार कर हत्या कर दी गयी, कहा जाता है कि महेंद्र कभी मुख्तार अंसारी का ड्राइवर था।

4 अगस्त 2022, दिन गुरुवार, एक दशक बाद एक तस्वीर सामने आई, ये तस्वीर उस शख्स की थी, जिसकी कहानियों ने उसे देखने की उत्सुकता बढ़ा दी… ये तस्वीर ब्रजेश सिंह की थी… ब्रजेश सिंह पर मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने का आरोप था और करीब एक दशक बाद जेल से रिहाई हुई थी… 11 अगस्त 2022, ये शायद पहली बार था जब ब्रजेश सिंह का परिवार के साथ सार्वजानिक रूप से तस्वीर सामने आई हो…

23 साल तक ब्रजेश सिंह को लेकर कई कहानियां सामने आयीं, उसके बाद 24 फरवरी 2008 को दिल्ली पुलिस ने ब्रजेश सिंह को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया था। ब्रजेश सिंह के परिवार का भाजपा से लगाव रहा है, वो एमएलसी रह चुके हैं और उसके बाद उनकी पत्नी एमएलसी हैं, परिवार में कई लोग राजनीति से जुड़े हैं, रिहाई के बाद ब्रजेश सिंह का धीरे धीरे सार्वजनिक कार्यक्रम में आना जाना शुरू हो गया..

7 जून 2023 को लखनऊ कोर्ट रूम में शार्प शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई। वही जीवा, जिसके बारे में कहा जाता है कि कृष्णानंद राय हत्या काण्ड में AK 47 से इसी ने गोलियां चलाई थी, हत्यारा वकील के भेष में था, आरोपी बदमाश विजय यादव (25) जौनपुर के केराकत कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला है। उसके ऊपर कोई बड़ा मुकदमा नहीं था…

नवम्बर 2024 के अंतिम सप्ताह में ब्रजेश सिंह के पुत्र की सगाई में जबरदस्त महफिल सजी। इस महफिल में प्रदेश के कई सीनियर नेता मौजूद रहे। राजा भैया से लेकर बृजेश पाठक और ओम प्रकाश राजभर तक के सगाई समारोह में पहुंचने की तस्वीर सामने आई है। कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ के होटल ताज में हुआ था। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी पहुंचे थे। नेताओं के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अब इस पर चर्चा शुरू हो गई। इन तस्वीरों ने हैरान किया क्योंकि इसमें अन्य दलों के वो नेता भी मौजूद थे, जिनकी नजदीकियां कभी मुख़्तार अंसारी से भी थी…

एक साल पहले सन्नाटे में से लड़खड़ाती आवाज ने अपने अंत का आगाज किया था… 28 मार्च 2024, दिन में करीब साढ़े 3 बजे…

मुख्तार अंसारी और मुख्तार के छोटे बेटे उमर की बात होती है…

  • उमर: पापा, आप ठीक हैं न?
  • मुख्तार: हां बाबू, हम ठीक हैं।
  • उमर: अल्लाह ने बचा लिया है, रमजान के इस पाक महीने में।
  • मुख्तार: मुझे बेहोशी आ रही है। बहुत कमजोरी लग रही है।
  • उमर: मैंने देखा न्यूज में आप कमजोर लग रहे हैं। हम कोर्ट में हैं। आपसे मुलाकात की परमिशन लेने के लिए। दरोगा अंकल हमारा काम करवा रहे हैं। अगर परमिशन मिली तो मिलने आएंगे।
  • मुख्तार: बेटा हम बैठ नहीं पा रहे हैं। हम उठ भी नहीं पा रहे हैं।
  • उमर: ये सब जहर का असर दिख रहा है। आप हिम्मत करके फोन कर लिया कीजिए। पापा आपकी आवाज सुनकर अच्छा लगता है।
  • मुख्तार: हां बाबू, बॉडी चली जाती है… लेकिन रूह यहीं रह जाती है।
  • उमर: आप हिम्मत रखिए… अभी तो आपको हज भी करना है… कोई और रहता तो अब तक मर गया होता।
  • मुख्तार: हम तो खड़े नहीं हो पा रहे हैं। मैं व्हील चेयर के सहारे हूं।
  • उमर: देखिएगा जल्द आप सेहतमंद होंगे। आप वॉशरूम जा रहे हैं या नहीं?
  • मुख्तार: दस दिन से मुझे मोशन नहीं हो पा रहा है।
  • उमर: आप परेशान न हो। मैं आपके लिए जमजम लेकर आऊंगा। खजूर लेकर आऊंगा… फल लेकर आऊंगा।

रूह यहीं रह जाती है… इस आवाज के करीब साढ़े पांच घंटे बाद… रूह से आज़ाद हो चुका जिस्म स्ट्रेचर पर पड़ा था…

इसी मार्च महीने में ब्रजेश सिंह ने अपने छोटे बेटे सागर सिंह की शादी की। शादी गोवा में हुई और रिसेप्शन बनारस में हुआ। इस रिसेप्शन में आसपास के जितने बाहुबली नेता थे, सभी पहुंचे। इसमें ब्रजभूषण सिंह, धनंजय सिंह, रघुराज प्रताप सिंह भी शामिल रहे। यूपी सरकार के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत करीब 10 से ज्यादा मंत्री और 20 से ज्यादा विधायक रिसेप्शन में शामिल हुए। साथ ही शामिल हुए उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, जिनकी पार्टी से मुख्तार अंसारी के पुत्र मुख्तार के पारंपरिक सीट यानि मऊ सदर से विधायक हैं, जिनको लेकर ओपी राजभर ने सफाई भी दी है कि वो सपा के नेता हैं, सपा गठबंधन में सीट दी थी, लेकिन जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद ओम प्रकाश राजभर, अब्बास अंसारी से फ़ोन पर हाल चाल ले ही लेते हैं…

जनता के लिए ये भावनाएं हैं लेकिन किसी के लिए ये विशुद्ध राजनीति…

By Abhinendra

Journalist

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