ईरान (Iran) ने रविवार को दावा किया कि उसने कुवैत (Kuwait) और बहरीन (Bahrain) में स्थित अमेरिका (America) के आठ सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी फोर्स (Revolutionary Force) के अनुसार यह कार्रवाई ईरान के ठिकानों पर अमेरिका की दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अमेरिका और इजराइल (Israel) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया हमलों को लेकर दोनों देशों के नेताओं के बयान और उन पर जताया गया गर्व अपराध स्वीकार करने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले 24 घंटे में सामने आए बड़े घटनाक्रम:
अमेरिका (America) ने लगातार दूसरे दिन ईरान (Iran) पर हवाई हमले किए। इन हमलों में किश्म द्वीप (Qeshm Island), सिरिक (Sirik) और बंदर-ए-लेंगेह (Bandar-e Lengeh) को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन (Bahrain) और कुवैत (Kuwait) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा कि अगले 30 दिनों तक होर्मुज (Hormuz) पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में रहेगा और यदि अमेरिका आगे कोई सैन्य कार्रवाई करता है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ट्रम्प और आईआरजीसी के बयान से बढ़ा तनाव:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता तो उसके अस्तित्व पर खतरा आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका अपने सैन्य अभियान को पूरी तरह अंजाम तक पहुंचाएगा। दूसरी ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से बना है विवाद:
ईरान (Iran) का परमाणु कार्यक्रम कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम विषय बना हुआ है। ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका (America) और इजराइल (Israel) इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
2015 के परमाणु समझौते की अहम बातें:
साल 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.67 प्रतिशत तक सीमित रखने पर सहमति जताई थी। इस स्तर का यूरेनियम परमाणु बिजलीघरों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि परमाणु हथियार तैयार करने के लिए सामान्यतः 90 प्रतिशत या उससे अधिक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता मानी जाती है।
2018 के बाद बदली स्थिति:
साल 2018 में डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने अमेरिका (America) को वर्ष 2015 के परमाणु समझौते से बाहर कर लिया। इसके बाद ईरान (Iran) ने धीरे-धीरे यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ाना शुरू कर दिया और 3.67 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से आगे बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार जून 2025 तक ईरान लगभग 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था तथा उसके पास करीब 400 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का भंडार मौजूद था। यह स्तर परमाणु हथियार के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत से कम, लेकिन नागरिक उपयोग की जरूरत से काफी अधिक माना जाता है।
क्षेत्रीय देशों से ईरान की अपील:
विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने इराक (Iraq) की राजधानी बगदाद (Baghdad) में प्रधानमंत्री अली फालेह अल-जायदी (Ali Faleh Al-Zaidi) से मुलाकात के दौरान क्षेत्रीय देशों से अपील की कि उनकी जमीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान (Iran) पर किसी भी हमले के लिए न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों की जिम्मेदारी है कि वे शांति और सुरक्षा बनाए रखें तथा किसी भी पक्ष को अपनी भूमि से सैन्य कार्रवाई की अनुमति न दें।
मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी पर नजर:
ईरान (Iran) के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के अंतिम संस्कार से पहले उनके बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को लेकर चर्चाएं तेज हैं। फरवरी में हुए हमले के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि 4 से 9 जुलाई के बीच आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति हो सकती है। ईरानी मीडिया के अनुसार 28 फरवरी को हुए हमले में उनके चेहरे और पैर में गंभीर चोटें आई थीं।
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी:
अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 72.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी बढ़कर 70.11 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
बहरीन को ईरान की चेतावनी:
ईरान (Iran) ने बहरीन (Bahrain) को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसे उकसाया गया तो पहले से अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा। अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के सलाहकार अली अकबर विलायती (Ali Akbar Velayati) ने कहा कि बहरीन को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिनसे ईरान को कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़े। दूसरी ओर बहरीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके क्षेत्र पर हुए हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन हैं।
होर्मुज से जारी रही जहाजों की आवाजाही:
हालिया सैन्य तनाव के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से जहाजों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं हुआ। 26 से 28 जून के बीच इस समुद्री मार्ग से कुल 48 जहाज गुजरे। इनमें 23 तेल और गैस टैंकर, 7 बल्क कैरियर तथा 19 कंटेनर और मालवाहक जहाज शामिल रहे। हालांकि तनाव बढ़ने से पहले की तुलना में जहाजों की संख्या कम दर्ज की गई।
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