संभल SP के पास 4 करोड़ का घर, DIG की संपत्ति 10 से घटकर 3.20 करोड़, जानिए IPS अफसरों के पास कितनी प्रॉपर्टी

गाजियाबाद (Ghaziabad) से लेकर लखनऊ (Lucknow) और राजस्थान (Rajasthan) तक आईपीएस अधिकारियों की घोषित संपत्तियों के आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए हैं। कहीं जमीन की कीमत एक साल में करोड़ों घट गई, तो कहीं कुछ ही महीनों में संपत्ति की वैल्यू डेढ़ गुना तक बढ़ गई। यह खुलासा उन दस्तावेजों से हुआ है, जो केंद्र सरकार के निर्देश पर आईपीएस अधिकारियों ने डीओपीटी (DoPT) को अपनी अचल संपत्ति के ब्योरे के रूप में सौंपे हैं। इन आंकड़ों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति में तेज गिरावट तो कुछ की संपत्ति में अचानक उछाल दर्ज किया गया है।

डीओपीटी को सौंपा गया संपत्ति विवरण:
केंद्र सरकार ने आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का पूरा विवरण कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को देने के निर्देश दिए थे। तय समयसीमा के भीतर आईपीएस अधिकारियों ने अपने-अपने संपत्ति विवरण जमा कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह सामने आया कि कई अधिकारियों की संपत्ति की कीमतों में बीते एक साल में बड़ा अंतर दिख रहा है।

संजीव त्यागी की संपत्ति में बड़ी गिरावट:
बस्ती रेंज (Basti Range) के डीआईजी संजीव त्यागी एक बार फिर संपत्ति के लिहाज से सबसे संपन्न आईपीएस अधिकारियों में शामिल हैं। उनके पास कुल पांच प्रॉपर्टी हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 30 करोड़ रुपये बताई गई है। उन्होंने वर्ष 2010 में गाजियाबाद के सदर इलाके में 0.838 हेक्टेयर जमीन 40 लाख रुपये में खरीदी थी, जिस पर 11 लाख रुपये का निर्माण कार्य भी कराया गया। वर्ष 2025 में इस जमीन और मकान की कीमत 10 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन 2026 में डीओपीटी को सौंपे गए ब्योरे में इसकी वैल्यू घटकर 3.20 करोड़ रुपये रह गई।

मोदीनगर की जमीन आधी कीमत पर:
संजीव त्यागी की ही एक अन्य प्रॉपर्टी गाजियाबाद के मोदीनगर (Modinagar) क्षेत्र में है। यह 0.356 हेक्टेयर जमीन उन्होंने 2015 में 50 लाख रुपये में खरीदी थी। ताजा ब्योरे में इस जमीन की मौजूदा कीमत 26 लाख रुपये दर्शाई गई है। यानी करीब 11 साल में जमीन की कीमत बढ़ने के बजाय घटती नजर आई है।

कृष्ण कुमार का राजस्थान में नया घर:
संभल (Sambhal) के चर्चित एसपी कृष्ण कुमार ने 2025 में किसी भी संपत्ति की घोषणा नहीं की थी। हालांकि 2026 के ब्योरे में उन्होंने राजस्थान में खरीदे गए एक मकान को दिखाया है। यह मकान 27 जनवरी को 3.40 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, जिसकी मौजूदा कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई गई है। इस संपत्ति में उनके भाई और बहन की भी हिस्सेदारी है। दस्तावेजों के अनुसार इस मकान से हर साल लगभग 4.80 लाख रुपये की रेंटल इनकम होती है और यह संपत्ति गिरवी रखी गई है।

छह महीने में डेढ़ गुना हुई जमीन की कीमत:
मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) के एसपी संजीव सुमन ने भी पिछले वर्ष तक कोई संपत्ति घोषित नहीं की थी। 2025 में उन्होंने लखनऊ में एक जमीन खरीदी, जिसकी कीमत मात्र छह महीने में डेढ़ गुना हो गई। 20 लाख रुपये में खरीदी गई इस जमीन की मौजूदा कीमत 30 लाख रुपये दिखाई गई है।

विनोद कुमार की संपत्ति में 1.72 करोड़ की कमी:
कन्नौज (Kannauj) के एसपी विनोद कुमार ने 2025 में कुल नौ संपत्तियां घोषित की थीं, जिनकी कुल कीमत 4.07 करोड़ रुपये बताई गई थी। इनमें पांच पुश्तैनी संपत्तियां शामिल थीं। 2026 में उन्होंने केवल पांच संपत्तियों का ही ब्योरा दिया है, जिनकी कुल वैल्यू 2.35 करोड़ रुपये है। इस तरह उनकी संपत्ति में 1.72 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

आईजी और एडीजी स्तर के अफसरों की संपत्ति:
झांसी रेंज (Jhansi Range) के आईजी आकाश कुल्हरि ने लखनऊ के मोहनलालगंज (Mohanlalganj) में शिप्रा स्टेट लिमिटेड (Shipra State Limited) की टाउनशिप में 240 वर्गमीटर जमीन 15 लाख रुपये में खरीदी है। इसके अलावा राजस्थान के जयपुर (Jaipur) में उनका भाई के साथ संयुक्त मकान भी है। यूपी 112 (UP 112) में तैनात आईजी के. एजिलारेसन के पास कुल 14 प्रॉपर्टी हैं, जबकि पिछले साल उन्होंने 13 संपत्तियों का ही जिक्र किया था।

मुख्यालय और जोन स्तर पर स्थिति स्थिर:
मुख्यालय स्तर पर डीजीपी, एडीजी कानून व्यवस्था, डीजी फायर सर्विस, डीजी जेल और एडीजी रेलवे जैसे अहम पदों पर तैनात अधिकारियों की संपत्ति में 2025 के मुकाबले कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। जोन स्तर पर भानु भास्कर की संपत्ति में एक की कमी आई है, जबकि रमित शर्मा के पास लगातार सात संपत्तियां बनी हुई हैं। लखनऊ जोन (Lucknow Zone) के एडीजी प्रवीण कुमार के नाम कोई भी संपत्ति दर्ज नहीं है।

रेंज में राकेश प्रकाश सिंह सबसे आगे:
रेंज स्तर पर राकेश प्रकाश सिंह आज भी सबसे बड़े जमींदार माने जाते हैं। उनके पास कुल 25 संपत्तियां हैं, जिनमें अधिकांश पुश्तैनी हैं। बीते वर्ष की तुलना में उनकी संपत्ति की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कुल मिलाकर अधिकतर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति में इस साल स्थिरता ही देखने को मिली है।

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