गाजीपुर: अनुदेशकों ने मनाई खुशी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

गाजीपुर से आई खबर में सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में तैनात अनुदेशकों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला। वर्षों से कम मानदेय और अस्थिर सेवा शर्तों को लेकर संघर्ष कर रहे अनुदेशकों ने इस फैसले को राहत भरा बताते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। फैसले के बाद अनुदेशकों में नई उम्मीद जगी है और उन्होंने इसे अपने लंबे संघर्ष की जीत बताया है।

A group of men standing together with raised fists in a show of solidarity or protest. They are dressed in various outfits, including formal and casual attire, against a backdrop of buildings and trees.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला माहौल:
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गाजीपुर जनपद के बेसिक स्कूलों में कार्यरत अनुदेशकों में उत्साह नजर आया। अनुदेशकों का कहना है कि लंबे समय से वे मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन अब न्यायालय के फैसले से उनकी आवाज को मजबूती मिली है। इस फैसले ने न सिर्फ आर्थिक राहत दी है बल्कि उनके सम्मान और कार्य स्थितियों को लेकर भी सकारात्मक संदेश दिया है।

बेसिक स्कूलों में तैनात अनुदेशकों की प्रतिक्रिया:
बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) के अंतर्गत कार्यरत अनुदेशकों ने फैसले पर खुशी जाहिर की। अनुदेशकों का कहना है कि अब तक उन्हें सीमित मानदेय में काम करना पड़ता था, जिससे जीवन यापन में कठिनाइयां आती थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि उनका भविष्य अधिक सुरक्षित और स्थिर होगा।

सदर यूआरसी पर हुआ आयोजन:
गाजीपुर की सदर यूआरसी (URC, Ghazipur) पर अनुदेशकों ने एकत्र होकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। यहां अनुदेशकों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी। आयोजन के दौरान अनुदेशकों ने कहा कि यह फैसला उनके लिए सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है।

मानदेय बढ़ोतरी को बताया ऐतिहासिक:
अनुदेशकों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानदेय बढ़ाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया। गौरतलब है कि न्यायालय ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बेसिक शिक्षा विभाग के अनुदेशकों का मानदेय 7 हजार रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 17 हजार रुपये करने का आदेश दिया है। अनुदेशकों का मानना है कि यह फैसला उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।

न्यायालय की टिप्पणी पर चर्चा:
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर भी चर्चा होती रही। न्यायालय ने अनुदेशकों की स्थिति को बंधुआ मजदूर जैसी बताते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। अनुदेशकों का कहना है कि इस टिप्पणी ने उनकी पीड़ा को सही तरीके से सामने रखा है और इसी के चलते यह फैसला संभव हो पाया।

सेवा शर्तों में सुधार की उम्मीद:
फैसले के बाद अनुदेशकों ने उम्मीद जताई कि आगे चलकर उनकी सेवा शर्तों में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि मानदेय बढ़ोतरी के साथ-साथ कार्य सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सकारात्मक बदलाव होने चाहिए। अनुदेशकों ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार जताते हुए इसे अपने अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया।

आगे की राह पर नजर:
अनुदेशकों का कहना है कि यह फैसला न केवल गाजीपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों के लिए मिसाल बनेगा। अब वे चाहते हैं कि आदेश का सही तरीके से पालन हो और उन्हें समय पर बढ़ा हुआ मानदेय मिले। पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए भी अनुदेशकों ने सजग रहने की बात कही।


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