इंडिगो एयरलाइन के लगातार बने संकट और यात्रियों की बढ़ती परेशानियों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। चार दिन तक हालात न संभलने पर अब सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं। यात्रियों को समय पर रिफंड, उनका सामान लौटाने और दूसरी एयरलाइंस द्वारा मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाने को लेकर सिविल एविएशन सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर लगातार उड़ानें रद्द होने से आम यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
सरकार का सख्त निर्देश इंडिगो को:
केंद्र सरकार के सिविल एविएशन मिनिस्ट्री (MoCA-अंतर्गत नागरिक उड्डयन मंत्रालय) ने इंडिगो को आदेश दिया है कि सभी पेंडिंग पैसेंजर रिफंड रविवार रात 8 बजे तक हर हाल में निपटाए जाएं। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन यात्रियों का सामान अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फंसा हुआ है, उनका लगेज अधिकतम 48 घंटे के भीतर यात्रियों तक पहुंचाया जाए। मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि आदेशों की अनदेखी करने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी एयरलाइंस को भी चेतावनी:
सरकार ने केवल इंडिगो ही नहीं, बल्कि अन्य घरेलू एयरलाइंस को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तय सीमा से अधिक हवाई किराया न वसूलें। इंडिगो की उड़ानें रद्द होने का फायदा उठाकर टिकट के दाम बढ़ाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी को देखते हुए मंत्रालय ने साफ किया है कि अतिरिक्त किराया वसूली किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एयरपोर्ट्स पर बढ़ती यात्रियों की नाराजगी:
शनिवार को भी देश के कई एयरपोर्ट्स से यात्रियों ने टिकट रिफंड और सामान न मिलने की शिकायतें दर्ज कराईं। मुंबई एयरपोर्ट (Mumbai Airport) पर हालात ज्यादा तनावपूर्ण नजर आए, जहां चार दिनों से लगेज न मिलने से परेशान पैसेंजर्स स्टाफ से बहस करते दिखे। यात्रियों का आरोप है कि न तो सही जानकारी दी जा रही है और न ही समस्या का समयबद्ध समाधान हो पा रहा है।

ऑपरेशन अब भी पटरी पर नहीं:
इंडिगो के ऑपरेशन में लगातार पांचवें दिन भी कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स दिल्ली (Delhi), मुंबई (Mumbai), चेन्नई (Chennai) और बेंगलुरु (Bengaluru) समेत कई शहरों से 400 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। बीते चार दिनों में ही 2,000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि रोजाना औसतन 500 उड़ानें देरी का शिकार हो रही हैं।
यात्रियों पर बढ़ता दबाव:
फ्लाइट कैंसिल और देरी के कारण हजारों यात्रियों को मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई यात्रियों के जरूरी काम अटक गए हैं तो कई को अतिरिक्त ठहराव और नए टिकट पर ज्यादा खर्च करना पड़ा है। इसी को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए यात्रियों के हितों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
DGCA के नए नियम बने बड़ी वजह:
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को इंडिगो की मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह माना जा रहा है। DGCA ने एयरलाइंस, खासतौर पर इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत जरूर दी है। इसके तहत वीकली रेस्ट के बदले दी जाने वाली छुट्टी से जुड़े पहले फैसले को फिलहाल वापस लिया गया है।
फ्लाइट ड्यूटी नियमों में बदलाव:
DGCA ने 1 नवंबर से पायलटों और अन्य क्रू मेंबर्स के कामकाज से जुड़े नियमों में बदलाव किए थे, जिन्हें फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नाम दिया गया। इन नियमों को दो चरणों में लागू किया गया। पहला चरण 1 जुलाई से प्रभावी हुआ, जबकि दूसरा चरण 1 नवंबर से लागू किया गया।
सुरक्षा बढ़ी, लेकिन स्टाफ की कमी:
नए नियमों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत पायलटों और केबिन क्रू को पर्याप्त आराम देने पर जोर दिया गया है। हालांकि इन नियमों के लागू होने के बाद इंडिगो के पास उपलब्ध पायलट और क्रू मेंबर्स की संख्या में कमी आ गई, जिसका सीधा असर फ्लाइट संचालन पर पड़ा। इसी कारण बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द और लेट हो रही हैं।

आगे की राह पर नजर:
सरकार के ताजा निर्देशों के बाद अब निगाहें इंडिगो की ओर टिकी हैं कि वह तय समयसीमा में रिफंड और लगेज से जुड़े मामलों को कितनी तेजी से सुलझाती है। साथ ही अन्य एयरलाइंस पर भी नजर रखी जा रही है ताकि यात्रियों से किसी तरह की अतिरिक्त वसूली न हो।
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