अमेरिका (United States) के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा टैरिफ रद्द करने के फैसले और उसके कुछ ही घंटों बाद डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के नए ग्लोबल टैरिफ ऐलान के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ होने जा रहा समझौता पहले की तरह आगे बढ़ेगा और इस प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया ऐलान:
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द करने का निर्णय सामने आया। इसके लगभग तीन घंटे बाद ही डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके तहत दुनियाभर के देशों पर 10 प्रतिशत का समान टैरिफ लागू होगा। इस ऐलान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल जरूर पैदा की, लेकिन भारत के साथ प्रस्तावित डील को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि समझौता तय दिशा में आगे बढ़ेगा।
भारत पर टैरिफ की स्थिति स्पष्ट नहीं:
भारत के साथ प्रस्तावित समझौते में यह नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ अलग से जोड़ा जाएगा या पहले से तय 18 प्रतिशत टैरिफ में समायोजित किया जाएगा, इस बारे में ट्रम्प ने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। हालांकि, BBC (British Broadcasting Corporation) की एक रिपोर्ट में व्हाइट हाउस (White House) के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे देशों को अब धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का सामना करना होगा। इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि पहले जिन दरों पर बातचीत हुई थी, उसकी जगह 10 प्रतिशत की दर लागू की जा सकती है। ऐसे में भारत पर कुल टैरिफ 18 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाने की संभावना जताई जा रही है।
फरवरी के अंत तक डील फाइनल:
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने जानकारी दी कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक अंतिम रूप ले लेगा। मार्च में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे और अप्रैल से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता भारत के निर्यातकों और उद्योगों के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा।
आने वाले महीनों में भारत अन्य बड़े देशों के साथ भी व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
23 फरवरी से अहम बैठक:
23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों तक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है। वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन (Darpan Jain) भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि टैक्स में 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने से जुड़ा आधिकारिक आदेश इसी या अगले सप्ताह तक जारी हो सकता है। इससे कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
7 फरवरी को हुआ था समझौते का ऐलान:
7 फरवरी को पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य टैरिफ पर निर्यात की अनुमति मिलेगी। वहीं, अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में किसी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य उत्पादों को भारत में प्रवेश की अनुमति इस समझौते के तहत नहीं दी गई है।
सरकार का दावा है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल बाजार के द्वार खोलेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीद:
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA – Interim Trade Agreement) का फ्रेमवर्क भी जारी किया है। इसके तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैक्स में 50 प्रतिशत की कमी करते हुए इसे 18 प्रतिशत किया गया है। रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ को लेकर उठापटक के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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