केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों और आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गुरुवार को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दे दी। यह आयात टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था के तहत 31 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। देश में पिछले दो महीनों के दौरान चीनी के दाम करीब 40 फीसदी तक बढ़ने के बीच सरकार ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बेहतर बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है। इस फैसले के साथ भारत करीब एक दशक बाद पहली बार चीनी का आयात करने जा रहा है।
त्योहारी मांग से पहले आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी:
अगस्त से नवंबर तक त्योहारी मौसम रहने के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और विभिन्न पकवानों की खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्किट और मिठाई बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारी मांग को देखते हुए पहले से चीनी का भंडारण करती हैं।
ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देकर बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाने का प्रयास किया गया है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे चीनी के भाव:
देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। महाराष्ट्र की मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमत हाल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थी। पिछले एक महीने के दौरान ही इसमें करीब 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, देश के कई हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इससे पहले चीनी के भाव इस स्तर तक नहीं पहुंचे थे। पिछले दो महीनों में कीमतों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी ने घरेलू बाजार में चिंता बढ़ाई है।
थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा और सख्त:
सरकार ने चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा भी सख्त कर दी है। बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले डीलर और कंपनियां अब अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगी।
यह व्यवस्था एक सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इससे पहले थोक उपभोक्ताओं के लिए 30 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित थी। कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद सरकार ने इसे घटाकर 15 दिन कर दिया है। इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है।
कमजोर मानसून से गन्ने पर बढ़ा दबाव:
चीनी की आपूर्ति को लेकर मौसम की स्थिति भी एक चुनौती बनी हुई है। गन्ने की फसल को पानी की अधिक आवश्यकता होती है और इसकी खेती में मानसून की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम चल रही है। जून के अंत में बारिश की कमी 40 फीसदी से भी अधिक थी।
14 अगस्त तक देश में गन्ने का रकबा 58.3 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है। ऐसे में आगामी समय में चीनी उत्पादन और बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर दबाव बना रहने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में जल्द शुरू होगी पेराई:
देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और महाराष्ट्र (Maharashtra) में चीनी मिलें इस साल सामान्य समय से पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मिलें नवंबर की शुरुआत से पहले ही पेराई शुरू करने की योजना बना रही हैं।
खाद्य मंत्रालय के साथ हुई बातचीत के बाद पेराई जल्द शुरू करने का फैसला लिया गया है। इसका उद्देश्य नई फसल से बनने वाली चीनी को जल्द बाजार में उपलब्ध कराना है, ताकि आपूर्ति पर बने दबाव को कम किया जा सके।
एक दशक बाद भारत करेगा चीनी का आयात:
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और सामान्य परिस्थितियों में चीनी के लिए आयात पर निर्भर नहीं रहता। इससे पहले वर्ष 2017-18 में देश ने बड़ी मात्रा में चीनी का आयात किया था।
इस बार सरकार ने 100 फीसदी आयात शुल्क हटाकर शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है। 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात से घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी।
अगले तीन महीने आपूर्ति पर रहेगी नजर:
त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए अगले तीन महीने चीनी की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सरकार की ओर से आयात की अनुमति, थोक भंडारण सीमा में कटौती और चीनी मिलों में जल्द पेराई शुरू करने की तैयारी के जरिए बाजार में उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
इन कदमों के बाद त्योहारी सीजन में चीनी की आपूर्ति को लेकर बने दबाव में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, आने वाले समय में बाजार में कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
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